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13-Oct-2026 07:33 PM
गांधीनगर। मूंगफली, कपास एवं अरंडी के सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- गुजरात में खरीफ फसलों की बिजाई समाप्त होने के बाद अब इसके विकास पर पक्का ध्यान केन्द्रित हो गया है। राज्य के कुछ भागों में लम्बे समय से अच्छी वर्षा नहीं होने के कारण फसलों की हालत कमजोर पड़ने की आशंका है। गुजरात सरकार ने खरीफ फसलों को बचाने के लिए बांधों-जलाशयों से पानी छोड़ने का फैसला किया है। इससे किसानों को काफी राहत मिल सकती है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष गुजरात में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 83.56 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 84.99 लाख हेक्टेयर से 1.43 लाख हेक्टेयर कम रहा। समीक्षाधीन सीजन के दौरान राज्य में धान, ज्वार, तुवर, उड़द, सोयाबीन तथा कपास के क्षेत्रफल में इजाफा हुआ जबकि दूसरी ओर बाजरा, मक्का, मूंग, मूंगफली, अरंडी, तिल एवं ग्वार के रकबे में गिरावट आ गई।
आमतौर पर राज्य में खरीफ फसलों की हालत सामान्य अथवा संतोषजनक बताई जा रही है लेकिन कुछ क्षेत्रों में बारिश का अभाव होने से फसलें प्रभावित हो रही है। फसलों को अब एक अच्छी सिंचाई की सख्त आवश्यकता है। नहरों का पानी इसमें मददगार साबित हो सकता है। गुजरात में अगैती बिजाई वाली खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी आरंभ हो चुकी है जबकि आगामी सप्ताहों के दौरान इसकी गति तेज होने की उम्मीद है।