श्रीलंका में लाल चावल के भारी अभाव के लिए पिछली सरकार जिम्मेदार

13-Jan-2025 05:20 PM

कोलम्बो । मूल्य नियंत्रण नीति को सख्ती से लागू किए जाने के बाद श्रीलंका के बाजारों से लाल चावल गायब हो गया और भारी अभाव के बीच इसका दाम स्वाभाविक रूप से उछल गया।

श्रीलंका के व्यापार मंत्री ने लाल चावल की भारी कमी के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार बताया है। व्यापार मंत्री के अनुसार राष्ट्र्पति चुनाव से पूर्व वाली सरकार ने दक्षिणी राज्यों में मिलर्स से काफी ऊंचे दाम पर लाल चावल की भारी खरीद करके उसे समूचे देश में वितरित करवा दिया।

यह चावल 10 रुपए प्रति किलो से अतिरिक्त मूल्य पर खरीदा गया था और इसका वितरण उन लोगों में भी किया गया जो आमतौर पर उसका उपयोग नहीं करते हैं। 

व्यापार मंत्री के मुताबिक श्रीलंका में लाल चावल का उपयोग मुख्यतः दक्षिणी राज्यों में तथा रत्नापुरा जिले में होता है। सरकारी आंकड़ों  के अनुसार श्रीलंका में औसतन 24 लाख टन चावल की वार्षिक खपत होती है और मासिक खपत 2 लाख टन के आसपास रहती है। इसके अलावा वहां करीब एक लाख टन गेहूं की मासिक खपत भी होती है।

व्यापार मंत्री के मुताबिक देश में लगभग 65 प्रतिशत चावल का उत्पादन नाडु श्रेणी का होता है। यह सफेद चावल सेला चावल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है।

इसके अलावा कुल चावल उत्पादन में 'केकुनू' की भागीदारी 15 प्रतिशत के करीब रहती है। इसी तरह लगभग 15 प्रतिशत का योगदान साम्बा चावल का तथा 4-5 प्रतिशत का योगदान बासमती चावल का रहता है जिसका उपयोग होटलों में किया जाता है। 

पिछले साल श्रीलंका में दोनों सीजन को मिलाकर लगभग 49 लाख टन धान का उत्पादन हुआ था जो 29 लाख टन चावल के समतुल्य था।

मांग एवं जरूरत की तुलना में यह करीब 5 लाख टन अधिशेष (सरप्लस) उत्पादन था लेकिन इसके बावजूद वहां चावल का अभाव देखा गया और भारत से इसका आयात करना पड़ा।