शिपिंग खर्च बढ़ने से चावल का वैश्विक व्यापार प्रभावित
03-Apr-2026 05:43 PM
बैंकॉक। ईरान-अमरीका युद्ध के कारण न केवल पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गया है बल्कि पेट्रोलियम का दाम बढ़ने से जहाज़ों का किराया भाड़ा भी काफी बढ़ गया है। इसके फलस्वरूप अन्य कृषि जिंसों के साथ-साथ चावल का वैश्विक व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। अफ्रीकी देशों में भारतीय चावल की मांग कमजोर पड़ गयी है। यूरोपीय देश तथा कुछ एशियाई देश थोड़ी-बहुत मात्रा में थाईलैंड से चावल खरीद रहे हैं जबकि वियतनाम में विभिन्न कारणों से चावल का दाम बढ़ गयी है।
वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य उछलकर 375 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है जो थाई चावल के लगभग बराबर है। वहां चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता घटती जा रही है। धान की फसल लगभग कट चुकी है और चावल की मिलिंग का खर्च बढ़ गया है। मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण क्रूड तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो गयी है और मिलर्स को चावल का दाम बढ़ाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
जहां तक थाईलैंड का सवाल है तो वहां 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफ़र मूल्य 370-375 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। उसकी मुद्रा (बहत) भी मजबूत बनी हुई है। थाई चावल की थोड़ी-बहुत निर्यात मांग तो निकल रही है लेकिन ऊंचे किराया-भाड़ा के कारण निर्यातक उसका शिपमेंट करने से हिचक रहे हैं और स्थिति के स्पष्ट होने का इन्तजार कर रहे हैं। वहां चावल की अच्छी आपूर्ति हो रही है।
