शुल्क मुक्त आयात की वजह से दलहनों के दाम में नरमी का माहौल

25-Jan-2025 11:46 AM

नई दिल्ली । लम्बे समय तक अत्यन्त ऊंचे स्तर पर बरकरार रहने के बाद दाल-दलहनों का भाव अब नरम  पड़ने लगा है और यह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास आ गया है।

इसके कारणों का खुलासा करते हुए आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान ने कहा है कि मुख्यत: विदेशों से विशाल मात्रा में शुल्क मुक्त आयात होने से घरेलू प्रभाग में दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ी है और खरीफ दलहनों-खासकर मूंग, उड़द एवं तुवर की आवक भी अच्छी  हो रही है जिससे कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है। दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की अवधि बार-बार बढ़ाई जा रही है। 

राहुल चौहान के अनुसार दिसम्बर 2023 में पीली मटर के आयात को शुल्क मुक्त किया गया था और तब से अब तक देश में लगभग 28 लाख टन पीली मटर का विशाल आयात हो चुका है।

इसमें से करीब 11 लाख टन का स्टॉक अब भी देश के विभिन्न बंदरगाहों पर मौजूद है जिसकी खपत घरेलू प्रभाग में होती है। इसके शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 28 फरवरी 2025 तक बढ़ा दी गई है। 

आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर का कहना है कि सभी दलहनों में पीली मटर सबसे सस्ती है इसलिए चना तथा तुवर के विकल्प के रूप में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

दलहनों का भाव एक-दूसरे की कीमतों के अनुरूप घटता-बढ़ता रहता है। यदि एक दलहन का दाम नरम पड़ता है तो दूसरे दलहन का मूल्य भी दबाव में आ जाता है।

विशाल आयात एवं घरेलू फसल की आपूर्ति के कारण तुवर के दाम में नरमी आने लगी है जबकि पीली मटर एवं मसूर की कीमतों में पहले से ही मंदी का माहौल बना हुआ है। इसका असर चना, उड़द एवं मूंग की कीमतों पर भी स्वाभाविक रूप से पड़ रहा है। 

विदेशों से विशाल मात्रा में आयात जारी रहने पर घरेलू प्रभाग में दलहनों का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

तुवर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक नियत कर दी गई है। उड़द, मसूर तथा चना के लिए भी ऐसा ही नीतिगत निर्णय लिए जाने की संभावना है।

यदि दलहनों का भाव घटता है तो सरकार को बफर स्टॉक के लिए इसकी भारी खरीद का सुनहरा अवसर मिल सकता है।