सरकार की सख्ती एवं व्यापारियों की मुनाफावसूली से चीनी में नरमी के आसार
22-Aug-2026 12:08 PM
नई दिल्ली। चीनी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी से चिंतित सरकार ने एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिया है। इसके तहत चीनी मिलों एवं डीलर्स स्टॉकिस्टों की गतिविधियों पर गहरी नजर रखते हुए बाजार की निगरानी की जा रही है और नए नियम लागू किए जा रहे हैं। दूसरी ओर विदेशों से 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के आयात की अनुमति दी गई है जिस पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा।
उल्लेखनीय है कि जोरदार तेजी के बाद देश में और खासकर महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में 21 अगस्त को चीनी के रिसेल मूल्य में 400-500 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई। समझा जाता है कि शुल्क मुक्त आयात की अनुमति के निर्णय का चीनी बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ने लगा है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार चीनी की मांग बेहद कमजोर पड़ गई है क्योंकि डीलर्स-स्टॉकिस्टों को लगता है कि चीनी की रिसेल (बिक्री) का भारी दबाव घरेलू बाजार पर पड़ सकता है जिससे कीमतों में नरमी आ सकती है। ऐसी स्थिति में ऊंचे दाम पर चीनी खरीदना घाटे का कारण बन सकता है। कच्ची चीनी का आयात जल्दी से जल्दी शुरू हो सकता है। जीएसटी तथा खाद्य विभाग के अधिकारी लगातार अपना शिकंजा कसते जा रहे हैं। कुछ डीलर्स ने चीनी की मुनाफावसूली (बिक्री) आरंभ कर दी है।
चीनी के खुदरा मूल्य में नरमी आने में कुछ समय लग सकता है। कुछ इकाइयों में चीनी का टेंडर मूल्य अब भी 6400-6500 रुपए प्रति क्विंटल के शीर्ष स्तर पर चल रहा है। रिसेल चीनी का तात्पर्य उस चीनी से है जिसे एजेंट या व्यापरियों ने टेंडर के माध्यम से पहले 5500-5800 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था मगर अभी तक उसका उठाव नहीं किया था। जब 20 अगस्त को चीनी का भाव काफी ऊंचा हो गया तब 21 अगस्त को उससे कम दाम पर इसकी बिक्री आरंभ कर दी।
कर्नाटक में चीनी के वेयरहाउस की जांच-पड़ताल शुरू हो गई है और केन्द्र सरकार द्वारा स्टॉक धारिता नियमों को सख्त बनाए जाने के बाद बल्क खरीदारों ने अपना स्टॉक खुले बाजार में उतारना आरंभ कर दिया है।
