राइस मिलर्स एवं निर्यातकों की लिवाली से धान-चावल में तेजी
नई दिल्ली। यद्यपि उत्तरी भारत की प्रमुख मंडियों में खरीफ कालीन धान की भरपूर आवक हो रही है जिसमें बासमती तथा 'ए' ग्रेड के गैर बासमती धान का स्टॉक भी शामिल है लेकिन फिर भी कीमतों पर कोई खास दबाव नहीं देखा जा रहा है क्योंकि राइस मिलर्स / प्रोसेसर्स तथा व्यापारियों-स्टॉकिस्टों के साथ-साथ निर्यातकों द्वारा भी इसकी खरीद में भारी दिलचस्पी दिखाई जा रही है। दरअसल अफ्रीकी देशों में गैर बासमती संवर्ग के मोटे चावल तथा पश्चिम एशिया एवं अमरीका-यूरोप में 'ए' ग्रेड एवं प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल की जोरदार मांग निकल रही है। हाल के दिनों में कीमत बढ़ने के बावजूद भारत का चावल वैश्विक निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।
आपूर्ति
24-30 अक्टूबर वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला एवं नजफगढ़ मंडी, पंजाब की अमृतसर, तरन तारन एवं फाजिल्का मंडी, हरियाणा की गोहाना, टोहाना, करनाल एवं पलवल मंडी तथा उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर, जहांगीराबाद, अलीगढ़ और खैर मंडी में बासमती धान और 1509 धान की जोरदार आपूर्ति हुई।
राजस्थान
राजस्थान की बूंदी मंडी तथा कुछ अन्य राज्यों की मंडियों में भी धान ही होने से काफी चहल-पहल देखी गई। मांग एवं लिवाली के आधार पर धान का भाव कहीं स्थिर तो कहीं तेज रहा। किसानों को इस बार आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है।
धान-चावल
धान का औसत भाव इस बार 3500-4000 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि ऊंचे में यह 4500-5000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। इससे चावल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। मालूम हो कि बासमती धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का निर्धारण नहीं होता है और इसका भाव मुख्यतः बाजार पर निर्भर रहता है।
निर्यात
अमरीका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पश्चिम एशिया, मध्यपूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देश भारत से जल्दी से जल्दी बासमती चावल का आयात करके अपने स्टॉक पोजीशन को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। वैसे होर्मुज स्ट्रेट का जलमार्ग अब भी असुरक्षित है लेकिन भारत से चावल का निर्यात नियमित रूप से जारी है।