समुद्री सतह का तापमान ऊंचा होने से अल नीनो का खतरा बढ़ा
02-Jun-2026 04:35 PM
बोस्टन। संयुक्त राष्ट्र संघ की अधीनस्थ एजेंसी- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यू एम ओ) का कहना है कि प्रशांत महासागर की निचली सतह का तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है जिससे अल नीनो के उत्पन्न होने तथा आगे बढ़ने की रफ्तार बढ़ गई है। ऐसा लगता है कि यह मौसम चक्र दरवाजे पर खड़ा है और कभी भी दस्तक दे सकता है। संगठन के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो के आने की संभावना बढ़कर 80 प्रतिशत पर पहुंच गई है जबकि नवम्बर के बाद भी इसकी सक्रियता जारी रहने के 90 प्रतिशत आसार हैं।
यह स्थिति भारत के लिए चिंताजनक साबित हो सकती है क्योंकि वहां खरीफ फसलों की बिजाई जून से तथा रबी फसलों की खेती अक्टूबर से शुरू हो जाती है। जुलाई-अगस्त में सर्वाधिक बारिश होती है और खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा बिजाई भी की जाती है। इसी तरह रबी फसलों की अधिकांश बिजाई नवम्बर-दिसम्बर में होती है।
मौसम सम्बन्धी मॉडल्स से जो संकेत मिल रहा है उससे पता चलता है कि अल नीनो आमतौर पर कम से कम सामान्य रहेगा जबकि इसके मजबूत एवं शक्तिशाली बनने की संभावना भी बरकरार रहेगी। वैसे इसकी सर्वोच्च ताकत एवं समयावधि के बारे में अभी कुछ हद तक अनिश्चितता बनी हुई है। सुपर अल नीनो बनेगा या नहीं अथवा कब तक यह चरम अवस्था पर पहुंचेगा- इस सम्बन्ध में निश्चित रूप से कुछ कहना अभी मुश्किल है।
दुनिया के अधिकांश मौसम पूर्वानुमान केन्द्र जून, जुलाई एवं अगस्त के दौरान सामान्य औसत से ऊंचा तापमान रहने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। अल नीनो की उत्पत्ति के लिए समुद्री सतह पर जितना गर्मी का आधार बिंदु जरुरी है वह गर्मी शीघ्र ही उस स्तर तक पहुंच जाएगी। कुछ देशों में जरूरत से काफी ज्यादा गर्मी पड़ सकती है जिससे वहां सूखे का संकट अधिक गंभीर हो सकता है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
