पश्चिम एशिया के संकट से भारतीय निर्यात प्रभावित
16-Mar-2026 11:36 AM
मुम्बई। ईरान और अमरीका- इजरायल के बीच पिछले 16-17 दिनों से भयंकर लड़ाई जारी रहने तथा होर्मुज स्ट्रेट एवं अन्य खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्ग पर जहाजों का आवागमन बंद होने से भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उद्योग-व्यापार क्षेत्र के अनुसार भारत से लगभग 70 प्रतिशत निर्यात शिपमेंट ठप्प पड़ गया है। शिपमेंट में हो रही देरी, शिपमेंट खर्च में हो रही बढ़ोत्तरी तथा बीच रास्ते से जहाजों की वापसी होने से निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहे हैं।
सामुद्रिक परिवहन के क्रम में कंटेनरों का किराया भाड़ा करीब 300 प्रतिशत बढ़ गया है। बंदरगाहों पर और बीच समुद्र में जहाज रुके हुए हैं जबकि पेट्रोलियम का वैश्विक बाजार भाव ऊंचा होता जा रहा है।
हालांकि सरकार ने निर्यातकों से उन खेपों की पहचान करने के लिए कहा है जिसे वैकल्पिक बाजारों की तरफ डायवर्ट किया जा सकता है लेकिन ऐसा करने में निर्यातकों को भारी कठिनाई हो सकती है क्योंकि शिपिंग कंपनियां रूट परिवर्तन की जिम्मेदारी लेने में आनाकानी कर रही हैं।
एक अग्रणी निर्यातक के अनुसार फिलहाल केवल 30 प्रतिशत खेपों का ही शिपमेंट संभव हो रहा है क्योंकि अधिकांश शिपिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएं स्थगित कर दी हैं।
भारत से बासमती चावल, चाय, कॉफी, मसालों, फल-सब्जी, चीनी तथा ऑयल मील के निर्यात पर गहरा असर पड़ रहा है।
