पश्चिम एशिया का संकट

07-Mar-2026 12:29 PM

पश्चिम एशिया का संकट दिन-प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। ईरान का इजरायल और अमरीका के साथ भयंकर युद्ध जारी है और कोई भी पक्ष सुलह करने के लिए तैयार नहीं दिखता है। इस अशांत एवं संकट पूर्ण माहौल के कई आयाम सामने आने लगे हैं जिसका असर भारत पर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से पड़ने लगा है।

ईरान द्वारा पश्चिम एशिया एवं खाड़ी क्षेत्र के एक दर्जन देशों पर इसके लिए जा रहे हैं जिससे वहां पेट्रोलियम का उत्पादन एवं कारोबार प्रभावित होने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम तेज होने लगा है। भारत में भी डीजल पेट्रोल एवं एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है।

पेट्रोल- डीजल का दाम बढ़ने से परिवहन खर्च में वृद्धि होगी और फिर खाद्य महंगाई में इजाफा  होने की आशंका रहेगी। यदि ईरान अमरीका के बीच युद्ध लम्बा चला तो पेट्रोलियम के अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य में और उछाल आएगा जिससे भारत और चीन समेत दुनिया के कई देशों को भारी कठिनाई हो सकती है। 

पश्चिम एशिया के संकट से भारत को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ पेट्रोलियम का आयात महंगा हो गया है तो दूसरी ओर खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात पर संकट के बादल छाने लगे हैं। ध्यान देने की बात है कि इन मुस्लिम बहुल देशों में अभी रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और इस समय वहां भारत से खासकर बासमती चावल तथा छोटी इलायची की विशाल मात्रा का आयात किया जाता है।

लेकिन समुद्री मार्ग खतरे से खाली नहीं है इसलिए भारतीय निर्यात अटक गया है। चारा, कॉफी, मसाले एवं ऑयलमील सहित अन्य उत्पादों का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। चीनी की खेप वहां नहीं पहुंच रही है। भारत का विदेश व्यापार घाटा पहले ही काफी बढ़ चुका है और ऐसी हालत में पश्चिम एशिया में निर्यात का बाधित होना अर्थ व्यवस्था के लिए शुभ नहीं है।