पाम तेल के मुद्दे पर इंडोनेशिया के बजाए यूरोपीय संघ का पक्ष ले रहा है डब्ल्यू टीओ

13-Jan-2025 01:47 PM

जेनेवा । विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू टीओ) के विशेषज्ञों ने इंडोनेशिया द्वारा की गई एक शिकायत पर गौर  करते हुए पाया है कि जैव ईंधन के निर्माण में पाम तेल के उपयोग पर यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाने का जो प्रस्ताव किया है वह काफी हद तक सही है।

उल्लेखनीय है कि दुनिया में पाम तेल के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- इंडोनेशिया ने वर्ष 2019 में यूरोपीय संघ के इस नियंत्रण की समीक्षा करने के लिए डब्ल्यू टीओ से एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने का आग्रह किया था।

इस विवाद निपटान पैनल ने यूरोपीय संघ के नियंत्रण को काफी हद तक सही माना है लेकिन कुछ मामलों में इसे उचित नहीं ठहराया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पैनल को इस नियंत्रण में कुछ खामियां नजर आई है कि जिन उपायों को चुनौती दी गई है उसे किस तरह तैयार किया गया उसका प्रकाशन कैसे हुआ और उसे किस तरह संचालित किया गया।  

विवाद निपटान पैनल ने यूरोपीय संघ के वर्ष 2018 के नवीनीकृत ऊर्जा दिशा निर्देश (आर ई डी 2) के प्रति चिंता भी जताई है जिससे सदस्य देशों में वनस्पति आधारित जैव ईंधन के निर्माण की क्षमता सीमित हो जाएगी।

इन देशों में पाम तेल के उपयोग पर पाबंदी लगने के बाद नवीनीकृत ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

वहां जैव ईंधन के निर्माण में पाम तेल का उपयोग को नियमित रूप से घटाते हुए वर्ष 2030 तक पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसे अधिकांश विशेषज्ञ व्यावहारिक नहीं मानते हैं लेकिन यूरोपीय संघ का कहना है कि पाम तेल का उत्पादन सस्टैनेबल नहीं है और जंगलों का सफाया करके तथा कृषि योग्य भूमि पर पाम का बागान लगाए जाने से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।