पॉल्ट्री फीड एवं एथनॉल निर्माण उद्योग में मक्का की खपत तेजी से बढ़ने की संभावना
13-Jan-2025 01:21 PM
हैदराबाद । चार-पांच साल पूर्व तक मक्का को कोई पूछने वाला नहीं मिल रहा था और बिहार सहित अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों के किसानों को औने-पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा था लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण उद्योग में इसकी अच्छी खपत होने के साथ एथनॉल उत्पादन में मक्का का भारी उपयोग होने लगा है और इसलिए इस मोटे अनाज का महत्व दिनों दिन तेजी से बढ़ता जा रहा है।
इसके साथ ही मक्का की कीमतों में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है। चार-पांच साल पहले मक्का का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से 50-60 प्रतिशत नीचे चल रहा था जो अब 20-25 प्रतिशत ऊपर चल रहा है।
केन्द्र सरकार ने 2024-25 सीजन के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2225 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि पिछले सप्ताह बिहार के बेगूसराय में इसका बेंचमार्क मंडी भाव 2800 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था।
यदि सरकार ने अनाज से निर्मित एथनॉल के दाम में बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया तो मक्का की कीमत आगे भी मजबूत बनी रहेगी।
मक्का की अधिक से अधिक मात्रा हासिल करने के लिए पॉल्ट्री उद्योग एवं एथनॉल निर्माताओं के बीच जोरदार प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है जबकि बढ़ती कीमतों को देखते हुए उत्पादक एवं स्टॉकिस्ट अपने माल की बिक्री धीमी गति से कर रहे हैं क्योंकि उन्हें आगामी समय में इसका दाम और भी बढ़ने की उम्मीद है।
ऊंचे बाजार भाव का एक परिणाम यह सामने आया है कि देश से मक्का का निर्यात लगभग ठप्प पड़ गया है और कम आय वर्ग के लोगों को खाद्य उदेश्य के लिए इसकी खरीद करने में भारी कठिनाई होने लगी है।
बढ़ती मांग एवं खपत को देखते हुए मक्का के घरेलू उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कृषि विशेषज्ञ इसके लिए किसानों को हाइब्रिड बीज का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने का सुझाव दे रहे हैं ताकि फसल की उपज दर बढ़ सके।
इस हाइब्रिड तकनीक को मक्का का उत्पादन बढ़ाने में काफी मददगार माना जा रहा है। पिछले साल लगभग 60 लाख टन मक्का का उपयोग एथनॉल उत्पादन में किया गया था।
