पिछले वित्त वर्ष में अधिकांश दलहनों का आयात घटा

17-Apr-2026 01:02 PM

नई दिल्ली। एग्री कॉमोडिटी मार्केट की एक अग्रणी रिसर्च फर्म- आईग्रेन इंडिया के सीएमडी राहुल चौहान का कहना है कि 2024-25 वित्त वर्ष की तुलना में 2025-26 के दौरान कुछ हद तक तुवर (अरहर) एवं उड़द को छोड़कर शेष लगभग सभी प्रमुख दलहनों के आयात में गिरावट आई क्योंकि देश में इसका अच्छा खासा पिछला बकाया स्टॉक उपलब्ध था।

ऑस्ट्रेलिया ने 2024-25 में भारत को रिकॉर्ड मात्रा में चना का निर्यात किया था और 2025-26 के सीजन में वहां उत्पादन भी उत्साहवर्धक हुआ। लेकिन वहां उत्पादक 575 डॉलर प्रति टन से नीचे दाम पर अपना चना बेचने के इच्छुक नहीं है इसलिए वहां से इसका आयात घट गया है। 

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अनुसार 2024-25 की तुलना में 2025-26 के दौरान पीली मटर का वैश्विक बाजार भाव 380-400 डॉलर प्रति टन से घटकर 320-330 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि भारत सरकार ने इस पर नवम्बर 2025 में 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा दिया था।

इसी तरह तुवर का वैश्विक बाजार मूल्य 2024-25 के 1000-1100 डॉलर प्रति टन से गिरकर 2025-26 में 700-850 डॉलर प्रति टन पर आ गया। चना का मामला भी कुछ इसी तरह का रहा। इसका भाव 2024-25 के 650 डॉलर प्रति टन से घटकर पहले 470-480 डॉलर प्रति टन पर आया लेकिन बाद में सुधरकर 510-520 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया।

चना के आयात में करीब 50 प्रतिशत की भारी गिरावट आ गई। पीली मटर का आयात भी घटकर आधा रह गया। मसूर के आयात की गति धीमी रही। तुवर और उड़द के आयात में सीमित बढ़ोत्तरी देखी गई। इससे दलहनों का कुल आयात काफी घट गया। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार दलहनों का कुल घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के 256.83 लाख टन से घटकर 2025-26 के सीजन में 238.69 लाख टन रह जाने की संभावना है।