बारिश की कमी एवं बढ़ती गर्मी से सूखने लगे-जलाशय
17-Apr-2026 03:48 PM
नई दिल्ली। लम्बे समय से देश के अधिकांश भागों में अच्छी वर्षा नहीं होने तथा तापमान में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी जारी रहने के कारण प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घटता जा रहा है और उसके सूखने का खतरा पैदा हो गया है। छोटे-छोटे नदी-नाले एवं कुआं-तालाब भी सूखने की ओर बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि भूजल एवं भूमिगत पानी का स्तर भी लगातर घटता जा रहा है।
केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि केवल पश्चिमी संभाग के बांधों-जलाशयों में कुल मिलाकर भंडारण क्षमता के 50 प्रतिशत से अधिक पानी का स्टॉक मौजूद है जबकि शेष क्षेत्रों में यह घटकर आधा से भी कम रह गया है। यदि शीघ्र ही मानसून पूर्व की अच्छी बारिश नहीं हुई तो बांधों में जलस्तर घटकर और भी नीचे जा सकता है।
देश के पश्चिमी संभाग के 53 प्रमुख बांधों-जलाशयों में फिलहाल 19.552 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 38.094 बीसीएम का 51.33 प्रतिशत है। वहां गुजरात के जलाशयों में 56 प्रतिशत, महाराष्ट्र के बांधों में 47 प्रतिशत तथा गोवा के एक मात्र जलाशय में 45 प्रतिशत पानी का स्टॉक बचा हुआ है। छ माह पूर्व यह पूरी तरह भरा हुआ था।
दक्षिण भारत की हालत नाजुक है। वहां 47 बांधों में पानी का स्टॉक घटकर मात्र 17.457 बीसीएम रह गया जो कुल भंडारण क्षमता 55.288 बीसीएम का 31.5 प्रतिशत है। गत वर्ष इस समय उन जलाशयों में 34 प्रतिशत पानी का भंडार बचा हुआ था। कर्नाटक एवं तेलंगाना के बांधों में जलस्तर घटकर 30 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है जबकि केरल के जलाशय में 33 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 40 प्रतिशत एवं तमिलनाडु के जलाशय में 41 प्रतिशत पानी का स्टॉक रह गया है।
