रूई का भाव तेज होने से वस्त्र उद्योग की चिंता बढ़ी
06-May-2026 05:33 PM
अहमदाबाद। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव ऊंचा एवं तेज होने से घरेलू प्रभाग में भी रूई की कीमतों में वृद्धि हो गई है। स्वयं सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने चालू सप्ताह के प्रथम दिन ही अपने स्टॉक की रूई के न्यूनतम बिक्री मूल्य में 2900 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) या 4 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी। न्यूयार्क एक्सचेंज (आईसीई) में रूई का दाम सुधरकर 84.50 सेंट प्रति पौंड से ऊपर पहुंच गया।
केन्द्र सरकार रूई के आयात को शुल्क मुक्त करने के मुद्दे पर टाल- मटोल कर रही है। कपड़ा मंत्रालय चाहता है कि रूई के आयात को तत्काल शुल्क मुक्त किया जाए मगर कृषि मंत्रालय इसके पक्ष में नहीं है जिसका कहना है कि सीसीआई के पास करीब 45-46 लाख गांठ रूई का स्टॉक मौजूद है जबकि किसानों एवं जिनिंग-प्रेसिंग इकाइयों के पास भी भंडार है। इस तरह कम से कम अगस्त 2026 तक की मांग एवं जरूरत की पूर्ति आसानी से हो सकती है।
यदि अभी रूई के आयात को शुल्क मुक्त किया गया तो किसानों में गलत संकेत जाएगा और कपास की खेती के प्रति उसके उत्साह एवं आकर्षण में कमी आ सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर कपास की बिजाई अगले महीने (जून) से शुरू होने वाली है। वैसे रूई का दाम बढ़ने से वस्त्र उत्पादों का लागत खर्च ऊंचा हो जाएगा।
