गेहूं की खरीद में कमी आने पर भी खाद्य सुरक्षा को खतरा नहीं
06-May-2026 03:54 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद गत वर्ष से पीछे चल रही है लेकिन इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं पैदा होगा क्योंकि सरकारी गोदामों में पहले से ही इसका विशालकाय पिछला बकाया स्टॉक मौजूद है। वैसे भी पंजाब-हरियाणा में पिछले साल से अधिक गेहूं खरीदा गया है और उत्तर प्रदेश में भी खरीद की गति सामान्य हो गई है।
राजस्थान में अतिरिक्त बोनस की घोषणा के बावजूद गेहूं की खरीद में कुछ कमी देखी जा रही है। असली समस्या मध्य प्रदेश के साथ है जहां प्रतीत होता है कि किसान सरकार को अपना गेहूं बेचने के प्रति ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। राज्य सरकार ने वहां स्लॉट बुकिंग की समय सीमा दो सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है।
अप्रैल के आरंभ में सरकारी गोदामों में 220 लाख टन से अधिक गेहूं का पिछला स्टॉक मौजूद था और मौजूद रबी मार्केटिंग सीजन की खरीद के साथ कुल स्टॉक बढ़कर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसके फलस्वरूप सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आपूर्ति के लिए गेहूं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा।
जुलाई से पूर्व खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत सरकारी गेहूं बेचने के बारे में नीतिगत निर्णय की घोषणा हो सकती है। पिछले महीने खाद्य सचिव ने इसका संकेत दिया था। इस बीच अप्रैल से जून तक गेहूं की खरीद का मुख्य मार्केटिंग सीजन जारी रहेगा। सरकार ने गेहूं की खरीद का लक्ष्य 303 लाख टन से बढ़ाकर 345 लाख टन निर्धारित कर दिया है। यदि मध्य प्रदेश में प्रदर्शन सामान्य रहा तो इस लक्ष्य के आसपास पहुंचाना संभव हो सकता है।
गेहूं का घरेलू उत्पादन 11 करोड़ टन से कुछ अधिक होने की संभावना है। सरकार 50 लाख टन गेहूं एवं 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति पहले ही दे चुकी है। फ्लोर मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारी / स्टॉकिस्ट किसानों से ऊंचे दाम पर गेहूं की भारी खरीद करने से हिचक रहे हैं क्योंकि पिछली बार उन्हें काफी घाटा हुआ था।
