News Capsule/न्यूज कैप्सूल: नेपाल से ड्यूटी-फ्री आयात में तेज बढ़ोतरी बनी प्रमुख वजह

19-May-2026 03:33 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: नेपाल से ड्यूटी-फ्री आयात में तेज बढ़ोतरी बनी प्रमुख वजह
★ SEA द्वारा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की अवधि के खाद्य तेल आयात आंकड़े जारी किए गए हैं। इस दौरान भारत ने कुल 166.51 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 161.82 लाख टन था। यानी ऊंचे अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज कमजोरी के बावजूद आयात में लगभग 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
★ कुल खाद्य तेल आयात में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह नेपाल से SAFTA व्यवस्था के तहत होने वाले ड्यूटी-फ्री आयात को माना जा रहा है। SAFTA समझौते के तहत नेपाल को भारत में रिफाइंड खाद्य तेलों के निर्यात पर शून्य आयात शुल्क की सुविधा प्राप्त है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान नेपाल ने भारत को 7.36 लाख टन खाद्य तेलों का निर्यात किया, जबकि पिछले वर्ष यह मात्रा केवल 3.45 लाख टन थी। इस प्रकार नेपाल से आयात में 113% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
★ नेपाल से आने वाले आयात में सबसे बड़ा हिस्सा रिफाइंड सोयाबीन तेल का रहा, जबकि इसके अलावा सीमित मात्रा में सनफ्लावर ऑयल, RBD पामोलीन और रेपसीड ऑयल का भी आयात हुआ।
★ यदि नेपाल को SAFTA के तहत ड्यूटी-फ्री निर्यात की सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो बढ़ती घरेलू मांग के बावजूद भारत का कुल खाद्य तेल आयात संभवतः पिछले वर्ष के स्तर से नीचे रह सकता था। नेपाल से रिफाइंड तेलों के ड्यूटी-फ्री आयात में आई तेज बढ़ोतरी ने भारत के कुल खाद्य तेल आयात को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
★ भारत आज भी खाद्य तेलों के मामले में संरचनात्मक रूप से आयात पर निर्भर बना हुआ है, क्योंकि घरेलू उत्पादन कुल आवश्यकता का केवल लगभग 40% ही पूरा कर पाता है। कम उत्पादकता, छोटी एवं बिखरी हुई जोत, सीमित सिंचाई सुविधाएं तथा गेहूं और धान जैसी फसलों को नीति स्तर पर अधिक प्राथमिकता मिलने के कारण देश में तिलहन उत्पादन की वृद्धि सीमित बनी हुई है।
★ एसोसिएशन का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन को मजबूत करना, उत्पादकता बढ़ाना और देश के भीतर वैल्यू एडिशन को प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है। इससे खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू खाद्य तेल क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
★ इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में खाद्य तेलों के अत्यधिक उपभोग में संयम बरतने की अपील भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अनावश्यक खपत को नियंत्रित किया जाए, तो इससे आयात निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा और वैश्विक आपूर्ति अनिश्चितताओं के बीच भारत की दीर्घकालिक खाद्य तेल सुरक्षा मजबूत हो सकेगी।