अप्रैल में भारतीय चावल के निर्यात में 6 प्रतिशत की गिरावट
19-May-2026 01:58 PM
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव एवं होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में व्यवधान पड़ने से बासमती का शिपमेंट प्रभावित होने के कारण अप्रैल 2026 में भारत से चावल के कुल निर्यात में बासमती की दृष्टि से 6 प्रतिशत की गिरावट आ गई। ज्ञात हो कि निर्यात मात्रा की दृष्टि से चावल भारत का सबसे प्रमुख कृषि उत्पाद है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 के दौरान चावल की निर्यात आय 6 प्रतिशत गिरकर 1.01 अरब डॉलर पर अटक गई। ईरान-अमरीका के बीच जारी तनाव एवं विवाद के कारण मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया तथा खाड़ी क्षेत्र के देशों और खासकर ईरान तथा सऊदी अरब में लम्बे दाने वाले सुगन्धित बासमती खासकर ईरान तथा सऊदी अरब में लम्बे दाने वाले सुगंधित बासमती चावल का निर्यात काफी हद तक बाधित हो गया। भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है।
व्यापारियों-निर्यातकों का कहना है कि भारतीय चावल को निर्यात के मोर्चे पर फिलहाल अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चावल के वैश्विक बाजार में सुस्ती एवं कमजोरी का माहौल बना हुआ है अप्रैल में निर्यात काफी कमजोर रहा। होर्मुज स्ट्रेट अब भी नहीं खुला है और ईरान-अमरीका के बीच दोबारा भयंकर युद्ध कभी भी शुरू हो सकता है।
उधर लाल सागर के जल मार्ग पर हूती विद्रोहियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे भारत से अमरीका तथा यूरोप को होने वाला निर्यात भी प्रभावित होने की आशंका है। शिपिंग तथा बीमा कंपनियां अपना चार्ज बढ़ा रही हैं। हालांकि एक सुरक्षित रास्ता अफ्रीका के दक्षिण से 'कैप ऑफ गुड हॉप' का खुला हुआ है लेकिन यह बहुत लम्बा मार्ग है और उसमें समय तथा खर्च भी ज्यादा लगता है।
खाड़ी क्षेत्र के लिए सामुद्रिक परिवहन का खर्च पहले 25 टन वाले कंटेनर के लिए केवल 500 डॉलर था जो मार्च 2026 में उछलकर 5000 डॉलर प्रति कंटेनर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
