News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कनाडा: चना, मटर और मसूर बाजार में सुस्ती, नई फसल और मौसम पर टिकी बाजार की नजर

30-Jul-2026 09:29 AM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: कनाडा: चना, मटर और मसूर बाजार में सुस्ती, नई फसल और मौसम पर टिकी बाजार की नजर
★ उत्तर अमेरिकी दलहन बाजार में इस सप्ताह चना, मटर और मसूर की कीमतों में खास बदलाव नहीं देखा गया। खरीदार फिलहाल नई फसल का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मौसम और भारत में कमजोर मानसून को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है।
★ काबुली चना बाजार में पुरानी और नई फसल दोनों के भाव लगभग समान बने हुए हैं। पुरानी फसल के लिए खरीदारों की बोली गुणवत्ता और दाने के आकार के अनुसार 0.25–0.27 डॉलर प्रति पाउंड एफओबी फार्म के बीच है, लेकिन इन स्तरों पर भी खरीदार सक्रिय खरीदारी नहीं कर रहे हैं। अधिकांश खरीदार पुरानी फसल की कीमत बढ़ाने के बजाय 2026 की नई फसल का इंतजार कर रहे हैं।
★ नई फसल के कुछ खरीदार 1–2 सेंट प्रति पाउंड अधिक कीमत देने को तैयार हैं, लेकिन ये अनुबंध आमतौर पर स्थगित डिलीवरी शर्त के हैं। नई फसल की कुछ बिक्री कर गोदाम में जगह बनाना और शुरुआती निकासी सुनिश्चित करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
★ यदि इस वर्ष मौसम अनुकूल रहता है तो 2025 की पुरानी फसल की मांग काफी सीमित रह सकती है। पिछले वर्ष की फसल में गुणवत्ता और ग्रेडिंग संबंधी समस्याएं भी अभी तक बाजार को प्रभावित कर रही हैं।
★ मटर बाजार भी सुस्त बना हुआ है। कटाई नजदीक होने के कारण खरीदार पुरानी फसल के बजाय नई फसल की कीमतों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। पीली मटर में कारोबार धीमा है, जबकि हरी मटर का भाव लगभग 9 डॉलर प्रति बुशल डिलीवरी पर बताया जा रहा है।
★ हाल के दिनों में मौसम संबंधी चिंता रोगों से हटकर अत्यधिक गर्मी पर केंद्रित हो गई है। अत्यधिक तापमान से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इस वर्ष मटर का रकबा भी कम बोया गया है, जिससे कुल उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में घट सकता है। हालांकि, पिछले वर्ष का बड़ा स्टॉक अभी भी उपलब्ध होने के कारण कीमतों में तेज मजबूती की संभावना सीमित बनी हुई है। बाजार का रुख अब कटाई शुरू होने के बाद वास्तविक उत्पादन और गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।
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★ मसूर में भी नई फसल की गुणवत्ता और दाने के आकार को लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। कुछ क्षेत्रों में फसल अच्छी है, जबकि कई इलाकों में फसल अभी भी कमजोर बनी हुई है।
★ बाजार की सबसे बड़ी चिंता भारत में सामान्य से कमजोर मानसून है। फिलहाल भारत के घरेलू बाजार में इसका असर कीमतों पर नहीं दिखा है, लेकिन यदि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों में सूखे के कारण उत्पादन घटता है तो इसका सबसे अधिक समर्थन लाल मसूर की कीमतों को मिलने की संभावना है। इसके मुकाबले हरी मसूर पर प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद है।
★ मौसमी सुस्ती के कारण मसूर की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि अगस्त में सीमित मात्रा में पुरानी फसल की निकासी के अवसर उपलब्ध हैं और निम्न गुणवत्ता वाली बड़ी हरी मसूर के लिए खरीदारों की रुचि अभी भी बनी हुई है।

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