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09-Oct-2026 04:30 PM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्र सरकार ने गेहूं के निर्यात को पूरी तरह नियंत्रण मुक्त कर दिया है और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इसका वैश्विक बाजार मूल्य भी ऊंचा एवं तेज चल रहा है लेकिन फिर भी भारतीय निर्यातकों को इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का निर्यात सौदा करने में ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। मुख्यतः बांग्ला देश के आयातक ही भारत से गेहूं मंगा रहे हैं। कुछ समय पूर्व श्रीलंका ने इसका आयात अनुबंध किया था मगर अब वह इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार सितम्बर 2026 तक देश से करीब 3-4 लाख टन गेहूं का निर्यात अनुबंध या शिपमेंट हुआ और उसकी अधिकांश खरीद बांग्ला देश द्वारा की गई। भारतीय गेहूं का निर्यात ऑफर मूल्य अपेक्षाकृत ऊंचा चल रहा है इसलिए दूरस्थ देशों के लिए इसका आयात करना आर्थिक दृष्टि से आकर्षक या लाभप्रद साबित नहीं हो रहा है। दक्षिण एशिया एवं दक्षिण- पूर्व एशिया के निकटवर्ती देश इसकी थोड़ी-बहुत खरीद कर सकते हैं।
आमतौर पर 2026-27 के दौरान भारत से कुल मिलाकर 7-8 लाख टन गेहूं का निर्यात होने का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन यदि रूस-यूक्रेन के बीच भयंकर जंग जारी रही और उसके प्रभाव से गेहूं के वैश्विक बाजार मूल्य में जोरदार तेजी आई तो भारत से इस अनाज का निर्यात बेहतर होने की संभावना बढ़ जाएगी।
बांग्ला देश में रूस से भारी मात्रा में गेहूं मंगाया जाता है लेकिन अभी वहां से इसके शिपमेंट में भारी बाधा पड़ रही है। इसके फलस्वरूप उसे भारत से इसका आयात करना पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं अमरीका में गेहूं का निर्यात ऑफर मूल्य बढ़ रहा है। शिकागो एवं पेरिस के साथ-साथ विनीपेग, सिडनी तथा ब्यूनस आयर्स के ग्रेन एक्सचेंजों में भी गेहूं के बेंचमार्क वायदा मूल्य में तेजी-मजबूती का माहौल देखा जा रहा है।