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रूस यूक्रेन युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल का आयात प्रभावित

09-Oct-2026 04:04 PM

रूस यूक्रेन युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल का आयात प्रभावित

मुम्बई। संसार के दो सबसे प्रमुख सूरजमुखी तेल निर्यातक देश- रूस तथा यूक्रेन के बीच जारी भयंकर युद्ध के कारण भारत में इस महत्वपूर्ण वनस्पति तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित होने लगा है। फिलहाल मुख्यतः लैटिन अमरीकी देश- अर्जेन्टीना से ही इसका आयात हो रहा है। रूस और यूक्रेन काला सागर क्षेत्र में एक-दूसरे के बंदरगाहों एवं व्यापारिक जहाजों पर जोरदार आक्रमण कर रहे हैं जिससे सूरजमुखी तेल सहित अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात शिपमेंट की प्रक्रिया लगभग ठप्प पड़ गई है। 

रूस से भारत को सूरजमुखी तेल के द्वारा निर्यात सौदे या तो कैंसिल हो रहे हैं या इसके शिपमेंट में देर हो रही है। समझा जाता है कि बंदरगाह पर हुई ढांचागत क्षति के कारण 20 हजार टन सूरजमुखी तेल का शिपमेंट कैंसिल हो गया जबकि लगभग 60 हजार टन अतिरिक्त तेल के कार्गो के रवाना होने में अनावश्यक देर हो रही है।

भीषण युद्ध एवं हमले की आशंका को देखते हुए काला सागर के जल मार्ग से जहाजों का आवागमन कम हो रहा है और परिवहन खर्च तथा बीमा व्यय में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। रूस के निर्यातक अब बाल्टिक सागर के पोर्ट से सूरजमुखी तेल के शिपमेंट की कोशिश कर रहे हैं जिसमें सेंट पीट्स बर्ग तथा उत्स-लुगा का बंदरगाह भी शामिल है।

लेकिन इस वैकल्पिक मार्ग से किराया-भाड़ा ज्यादा बैठेगा और समय भी 10 दिन अधिक लगेगा। इससे आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की संभावना है। भारत में प्रति माह औसतन 2.00 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात होता है मगर अक्टूबर में इसकी मात्रा घटकर 1.60 लाख टन के आसपास सिमट जाने की संभावना है। अगस्त-सितम्बर में भी इसका आयात कम हुआ। भारत सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर रहता है।