मार्च-जून के चार माह में 65 लाख टन सरसों की आवक

08-Jul-2026 08:36 PM

जयपुर। रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा होने के कारण जहां एक ओर इसकी भारी आवक हो रही है वहीं दूसरी तरफ सरकारी एजंसियों को इसकी खरीद करने में सफलता नहीं मिल रही है।

जयपुर के चांदपोल की अनाज मंडी में उपस्थित मशहूर एवं विश्वसनीय प्रतिष्ठान- मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर- अनिल चतर द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन के शुरुआती चार महीनों में यानी मार्च-जून 2026 के दौरान कुल 65 लाख टन सरसों की आपूर्ति हुई जिसमें सरकारी क्रय केन्द्रों में पहुंची 50 हजार  टन सरसों भी शामिल है। इसकी खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा एमएसपी पर की गई। 

अनिल चतर के अनुसार मार्च में 19 लाख टन, अप्रैल में 20 लाख टन, मई में 16 लाख टन एवं जून में 10 लाख टन सरसों की आवक हुई। 65 लाख टन की कुल आवक में से 53 लाख टन सरसों की क्रशिंग हो गई।

नैफेड /  हैफेड के पास 1 लाख टन का पुराना एवं 50 हजार टन का नया स्टॉक था। इसमें से 1 लाख टन सरसों की बिक्री हो गई। 1 जुलाई 2026 को किसानों के पास 51.25 लाख टन, मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों- स्टॉकिस्टों के पास 13.50 लाख टन तथा सरकारी एजेंसियों के पास 50 हजार टन के साथ देश में कुल 65.25 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ था जिसकी आवक एवं क्रशिंग आगामी महीनों में होगी।

2025-26 के सीजन में राजस्थान में 54.25 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 19 लाख टन, हरियाणा / पंजाब में 13.50 लाख टन, मध्य प्रदेश में 13 लाख टन, गुजरात में 5 लाख टन तथा बंगाल-बिहार सहित अन्य राज्यों में 12.50 लाख टन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर कुल 117.25 लाख टन सरसों का उत्पादन आंका गया है। इसमें से 3 लाख टन की आवक फरवरी में हो गई और मार्च से आरंभ होने वाले मार्केटिंग सीजन के लिए 114.25 लाख टन सरसों का स्टॉक उपलब्ध रहा।