महाराष्ट्र में ग्रीष्मकालीन फसलों के क्षेत्रफल में 2.8 प्रतिशत की गिरावट
23-May-2024 04:09 PM
मुम्बई । पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान महाराष्ट्र में ग्रीष्मकालीन (जायद) फसलों का बिजाई क्षेत्र 2-8 प्रतिशत गिरकर 4,24,345 हेक्टेयर पर सिमट गया। गत वर्ष यह क्षेत्रफल 4,36,769 हेक्टेयर रहा था। बिजाई क्षेत्र का पंचवर्षीय औसत आंकड़ा 3,49,759 हेक्टेयर आंका गया है। खरीफ सीजन से पूर्व जायद फसलों की खेती होती है।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 की तुलना में 2024 के जायद सीजन के दौरान महाराष्ट्र में अनाजी फसलों का उत्पादन क्षेत्र 2,98,846 हेक्टेयर से सुधरकर 3,03,805 हेक्टेयर पर पहुंचा।
वहां मूंगफली के बाद धान को ग्रीष्मकालीन का दूसरा सबसे प्रमुख कृषि उत्पाद माना जाता है। धान का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 1,65,650 हेक्टेयर से सुधरकर इस बार 1,67,720 हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 83,011 हेक्टेयर का लगभग दोगुना है।
लेकिन दूसरी ओर मक्का का बिजाई क्षेत्र इसी अवधि में 72,482 हेक्टेयर से घटकर 61 हजार हेक्टेयर रह गया। खाद्यान्न फसलों का सकल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 3,13,952 हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 3,17,307 हेक्टेयर हो गया लेकिन दलहन फसलों का रकबा 15,106 हेक्टेयर से गिरकर 13,502 हेक्टेयर रह गया। इसके तहत मूंग का बिजाई क्षेत्र 12,813 हेक्टेयर से फिसलकर 11,778 हेक्टेयर पर अटक गया।
तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र भी पिछले साल के 1,22,817 हेक्टेयर से घटकर इस बार 1,07,038 हेक्टेयर पर सिमट गया। इसके तहत मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 82,694 हेक्टेयर से गिरकर 78,767 हेक्टेयर तथा सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 22,922 हेक्टेयर से लुढ़ककर 5299 हेक्टेयर रह गया।
महाराष्ट्र के बांधों-जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता के सापेक्ष केवल 24 प्रतिशत पानी बचा हुआ है जो पिछले साल उपलब्ध भंडार 34.4 प्रतिशत से भी कम है। इससे फसलों की सिंचाई के लिए पानी का अभाव हो गया है।
