महाराष्ट्र में गन्ना की जोरदार क्रशिंग से चीनी का उत्पादन 82.56 लाख टन पर पहुंचा
07-Feb-2026 01:00 PM
मुम्बई। चीनी के उत्पादन में महाराष्ट्र 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में उत्तर प्रदेश से पिछड़कर दूसरे नम्बर पर आ गया था लेकिन 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन में अब तक मिल रहे संकेत से पता चलता है कि वह पुनः नंबर वन की पोजीशन पर पहुंच जाएगा। राज्य की चीनी मिलों को अभी गन्ना की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है और इसकी जोरदार क्रशिंग से चीनी का उत्पादन बढ़ रहा है।
चीनी आयुक्त कार्यालय से जारी आंकड़ों से ज्ञात होता है कि चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान 5 फरवरी 2026 तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन बढ़कर 82.56 लाख टन पर पहुंच गया। इस अवधि में वहां 199 चीनी मिलों में 888.80 लाख टन गन्ना की क्रशिंग हुई और गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर सुधरकर 9.29 प्रतिशत पर पहुंच गई।
इस बार राज्य में सरकारी क्षेत्र को 98 एवं प्राइवेट क्षेत्र की 101 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग हो रही है। फरवरी 2026 के अंत तक चीनी मिलों को गन्ना की भरपूर आपूर्ति होने की उम्मीद है और उसके बाद ही आपूर्ति की गति धीमी पड़ने की संभावना है। उद्योग समीक्षकों के मुताबिक महाराष्ट्र में इस बार चीनी का कुल उत्पादन 100 लाख टन से ऊपर पहुंच सकता है।
महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्र- कोल्हापुर डिवीजन में चीनी का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और इसकी रिकवरी दर भी ऊंची देखी जा रही है। वहां कुल 37 किलो में अभी तक 190 लाख टन गन्ना की क्रशिंग से 20.62 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है।
इसके साथ-साथ पुणे, सोलापुर एवं अन्य संभागों में भी चीनी का शानदार उत्पादन हो रहा है। 5 फरवरी 2026 तक पुणे संभाग में 19.17 लाख टन एवं सोलापुर संभाग में 17 लाख टन से ज्यादा चीनी का उत्पादन हुआ।
महाराष्ट्र में पिछले साल की समान अवधि में यानी 5 फरवरी 2025 तक 673.66 लाख टन गन्ना की क्रशिंग हुई थी जबकि चीनी की रिकवरी दर 9.12 प्रतिशत रही थी।
उत्तर प्रदेश, कर्नाटक एवं गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी चीनी का उत्पादन बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। 31 जनवरी 2026 तक देश में करीब 195 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ।
