महंगे आयात एवं कमजोर उत्पादन से तुवर के दाम में सुधार
29-Jan-2026 01:12 PM
मुम्बई। पिछले कुछ दिनों से तुवर बाजार में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है क्योंकि एक तो खरीफ सीजन के इस सबसे महत्वपूर्ण दलहन के घरेलू उत्पादन में गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं और इसकी क्वालिटी को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है जबकि विदेशों से इसका आयात महंगा बैठने लगा है।
मंडियों में तुवर की आवक उम्मीद के अनुरूप नहीं हो रही है और दाल मिलर्स तथा स्टॉकिस्ट इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आयात की गति धीमी रहने तथा सरकारी खरीद शुरू होने की संभावना से भी तुवर की कीमतों को ऊपर उठने का सहारा मिल रहा है।
व्यापार विशेलषकों के मुताबिक तुवर का भाव सरकारी समर्थन मूल्य तक पहुंच चुका है जबकि आगे इसमें और भी इजाफा होने की उम्मीद है।
कुछ समीक्षकों का मानना है कि निकट भविष्य में अरहर (तुवर) का दाम बढ़कर 9000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है। सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए तुवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 8000 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया है जो 2024-25 के एमएसपी 7550 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक है।
पिछले दिनों तुवर का भाव महाराष्ट्र के अकोला में 6700/8400 रुपए प्रति क्विंटल तथा मध्य प्रदेश के कटनी में 8200/8300 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। देश के शीर्ष उत्पादक राज्य- कर्नाटक की मंडियों में तुवर के नए माल की आवक उम्मीद से कम हो रही ही।
समझा जाता है कि सितम्बर-अक्टूबर के दौरान अत्यधिक वर्षा होने से कर्नाटक में तुवर की फसल क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसी तरह महाराष्ट्र में भी फसल को नुकसान होने की खबर है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है।
महाराष्ट्र में तुवर के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र- विदर्भ संभाग में उत्पादन घटने की संभावना से पिछले सप्ताह बाजार तेज हो गया।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक इस संभाग में उत्पादन 20 प्रतिशत तक घटने की संभावना है। विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से कुछ क्षेत्रों में तुवर के दाने की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है।
