खरीफ फसलों की पैदावार पर अल नीनो का गंभीर असर पड़ने की आशंका
19-May-2026 06:01 PM
नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीनस्थ एक शोध संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि ऐतिहासिक रूप से भारत में अल नीनो मौसम चक्र के प्रकोप से प्रमुख खरीफ फसलों की उपज दर में भारी गिरावट आ जाती है। देश के जो इलाके वर्षा पर आश्रित हैं वहां नुकसान की आशंका ज्यादा रहती है।
अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो वाले वर्षों के दौरान देश के 77 जिलों में औसतन धान तथा 65 जिलों में मक्का के उत्पादन में 10-10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ गई। अलनीनो मौसम चक्र का सर्वाधिक असर उन राज्यों पर देखा गया जहां धान का उत्पादन ज्यादा होता है। इसमें आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड एवं उड़ीसा आदि शामिल है। इसके अलावा देश के 36 जिलों में ज्वार एवं बाजरा की उपज दर में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
मानसून की वर्षा पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में अल नीनो वाले वर्षों के दौरान अक्सर फसलों को भारी क्षति होती रही है। इस बार असर कुछ ज्यादा पड़ने की आशंका है क्योंकि कुछ विशेषज्ञ इस मौसम चक्र को सुपर अल नीनो की संज्ञा दे रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि चालू वर्ष के दौरान यह ज्यादा उग्र एवं तीव्र रूप में आ सकता है। इससे पूर्व भारत में आने वाला अल नीनो सामान्य स्तर का था और प्रभाव सीमित रहता था। इस बार स्थिति कुछ भिन्न हो सकती है।
भीषण गर्मी ऊंचे तापमान एवं वर्षा के अभाव से इस बार नदी-नाले एवं कुआं-तालाब सूखने लगे हैं। इससे कृत्रिम सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता का संकट बढ़ेगा। वैसे अल नीनो की वजह से देशों के सभी भागों में सूखा पड़ने की संभावना नहीं है लेकिन वर्षा की स्थिति अनियमित एवं अनिश्चित रह सकती है। देश के कुछ इलाकों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश से जलभराव एवं बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
