क्या धनिया दोहराएगा- 2022 का इतिहास

25-Mar-2026 06:56 PM

नई दिल्ली। विगत कुछ दिनों से धनिया के भाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। जोकि जोखिम का व्यापार हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर नए मालों की आवक अच्छी चल रही है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट देशों में युद्ध के चलते निर्यातक मांग का भी अभाव बना हुआ है पैसे की किल्लत होने के कारण हाजिर में उठाव भी कम है लेकिन इसके बावजूद कीमतें लगातार बढ़ रही है जोकि समझ से परे है। व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान में चल रही तेजी केवल सट्टेबाजी के कारण हो रही है जोकि आगामी दिनों में घाटे का सौदा हो सकती है। 

वर्ष- 2022 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 के दौरान स्थिति ऐसी ही बनी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल- 2022 में मंडियों में अन्य मालों की आवक अच्छी चल रही थी लेकिन भाव लगातार बढ़ रहे थे और मंडियों में ईगल क्वालिटी का 115/120 रुपए एवं बादामी का भाव 110/115 रुपए के उच्चतम स्तर पर बोला जाने लगा था। उस समय व्यापारिक धारणा बन गई थी कि ईगल का भाव 145/150 रुपए का स्तर छू जाएगा। और ऊंचे भावों पर स्टॉकिस्टों ने स्टॉक किया। परिणामस्वरूप स्टॉकिस्टों को घाटा उठाना पड़ा। 

चालू सीजन 

हालांकि यह सच है कि चालू सीजन के दौरान देश में धनिया का उत्पादन कम रहेगा। मगर नए मालों की आवक के समय कीमतों में तेजी हमेशा नुकसानदायक रहती है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 के पश्चात से देश में धनिया की पैदावार घट रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में पैदावार 1.60 करोड़ बोरी की रही थी जोकि वर्ष 2024 में से घटकर 1.20 करोड़ बोरी एवं वर्ष 2023 में 1.10 करोड़ बोरी की रह गई जबकि वर्ष 2026 में पैदावार 95/97 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 40 किलो) होने के अनुमान है। 

मुनाफावसूली संभव 

जानकारों का कहना है कि ऊंचे भावों पर बाजारों में मुनाफावसूली आने की संभावना है जिस कारण से अप्रैल में कीमतों में मन्दा आने के अनुमान है। उल्लेखनीय है कि गुजरात की अधिकांश मंडियों में अवकाश चल रहा है। जबकि चालू सप्ताह के दौरान मध्य प्रदेश की मंडियों में भी अवकाश शुरू हो जाएगा। अतः अप्रैल माह में मंडियां खुलने के पश्चात मंडियों में आवक का दबाव बनेगा। और भाव भी घटेगे। मगर अधिक नहीं। क्योंकि चालू सीजन के दौरान देश में धनिया की कुल उपलब्धता खपत की तुलना में कम रहेगी। सूत्रों का कहना है कि निर्यात एवं लोकल खपत को मिलाकर लगभग 1.50 करोड़ बोरी की आवश्यकता होती है कि लेकिन वर्ष 2026 के दौरान बकाया स्टॉक 20/25 लाख बोरी एवं नई पैदावार 95/97 लाख बोरी को मिलाकर कुल उपलब्धता लगभग सवा करोड़ बोरी की रहेगी। जिस कारण से 2026 के दौरान भाव मजबूत रहेंगे।