कमजोर निर्यात प्रदर्शन के कारण जीरा की कीमतों में जोरदार तेजी नहीं

20-Jun-2026 12:29 PM

राजकोट। सबसे प्रमुख खरीदार देश- चीन की मांग कमजोर रहने तथा पश्चिम एशिया में फैली अशांति के कारण डिस्पैच में बाधा पड़ने के कारण वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारतीय जीरे का निर्यात प्रदर्शन काफी कमजोर पड़ गया। मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार भारत से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 2.29 लाख टन जीरा का निर्यात हुआ था जो वित्त वर्ष 2025-26 में 14 प्रतिशत गिरकर 1.96 लाख टन पर सिमट गया।

समीक्षाधीन अवधि में इसकी निर्यात आय भी 73.235 करोड़ डॉलर से 28 प्रतिशत घटकर 52.40 करोड़ डॉलर तथा भारतीय मुद्रा में निर्यात आमदनी 6178.86 करोड़ रुपए से 25 प्रतिशत घटकर 4611.15 करोड़ रुपए रह गई। जीरा का औसत निर्यात ऑफर मूल्य भी नीचे रहा।

चीन में बेहतर घरेलू उत्पादन एवं ऊंचे बकाया स्टॉक के कारण जीरा के आयात में 76 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आ गई। वहां 2024-25 में भारत से 38,721 टन जीरा का शानदार आयात हुआ था जो 2025-26 में लुढ़ककर 9271 टन पर अटक गया।

चीन को हुए जीरा के निर्यात से आमदनी भी 11.451 करोड़ डॉलर से 80 प्रतिशत घटकर 2.281 करोड़ डॉलर पर अटक गई। पिछले साल चीन में जीरा का उत्पादन बढ़कर 85-90 हजार टन के करीब पहुंच गया जिससे उसे भारत से इस महत्वपूर्ण मसाले का आयात घटाने में सफलता मिल गई। 

पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अफ्रीका (मेना) क्षेत्र में भी भारत से जीरा का निर्यात प्रभावित हुआ क्योंकि ईरान-अमरीका युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट का जल मार्ग बंद हो गया था।

इतना ही नहीं बल्कि इस अवधि के दौरान अमरीका, संयुक्त अरब अमीरत (यूएई), बांग्ला देश एवं ब्रिटेन सहित कई अन्य प्रमुख आयातक देशों में भी भारत से जीरा का निर्यात घट गया जबकि तुर्की में निर्यात कुछ बेहतर रहा। 

वर्तमान समय में भी भारतीय जीरा का निर्यात प्रदर्शन ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं है जबकि देश में इस मसाले का भारी स्टॉक मौजूद है। पिछले महीने ही फसल की कटाई-तैयारी समाप्त हुई है। घरेलू मांग भी अभी कमजोर ही है। कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।