जून में मानसून की बारिश सामान्य औसत से 40 प्रतिशत कम
30-Jun-2026 01:43 PM
नई दिल्ली। चालू वर्ष के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत बेहद निराशाजनक देखी जा रही है। मानसून सीजन के प्रथम माह यानी जून में दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई जिससे प्रमुख खरीफ फसलों के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आ गई। मानसून की गति अब भी धीमी चल रही है।
जुलाई, अगस्त एवं सितम्बर के शेष तीन महीनों में भी मानसून की तीव्रता, गतिशीलता एवं सक्रियता में जबरदस्त सुधार आना मुश्किल लगता है। 29 जून तक राष्ट्रीय स्तर पर केवल 9.21 से० मी० बारिश हुई जो सामान्य औसत से 42 प्रतिशत कम रही। जून के प्रथम पखवाड़े में वर्षा की स्थिति कुछ हद तक संतोषजनक रही मगर दूसरे हाफ में बारिश की कमी बढ़कर 47 प्रतिशत पर पहुंच गई।
हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष मानसून सीजन के दौरान देश में एलपीए के सापेक्ष 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान लगाते हुए कहा है कि यह एलपीए 86.86 से०मी० आंका गया है जबकि वास्तविक वर्षा 78.17 से०मी० हो सकती है।
यदि जून की कुल वर्षा 10 से०मी० मान ली जाए तो जुलाई-सितम्बर की तिमाही में 68.17 से०मी० बारिश की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि तभी कुल मानसूनी वर्षा 90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अल नीनो के प्रभाव से मानसून की बेहद कमजोर स्थिति को देखते हुए इस बार एलपीए के मुकाबले कुल वर्षा 90 प्रतिशत तक पहुंचना मुश्किल है।
एक मौसम मॉडल तो पूरे मानसून सीजन (जून-सितम्बर) में दीर्घकालीन वर्षा औसत की तुलना में महज 50 प्रतिशत बारिश होने का संकेत दे रहा है जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए निहायत चिंताजनक है। इससे खरीफ फसलों का उत्पादन घट सकता है।
