गर्म एवं शुष्क मौसम से गेहूं की फसल को खतरे की आशंका

16-Feb-2026 07:58 PM

नई दिल्ली। फरवरी एवं मार्च का मौसम गेहूं की फसल के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस समय पौधों में फूल एवं दाना लगने की प्रक्रिया जारी रहती है। मौसम की हालत प्रतिकूल होने से इस प्रक्रिया के प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी और इससे खासकर गेहूं की औसत उपज दर एवं दाने की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। 

आमतौर पर मौसम विभाग ने फरवरी में गेहूं के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में तापमान सामान्य स्तर से ऊंचा रहने तथा बारिश सामान्य औसत से कम होने की संभावना व्यक्त की है लेकिन पिछले सप्ताह की गई भविष्यवाणी के अनुसार 16 से 20 फरवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता एवं बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने वाले कम दाब के क्षेत्र के प्रभाव से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के कुछ भागों में वर्षा होगी या गरम-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है।

ऐसा होने से गेहूं की फसल को काफी राहत मिल सकती है। अभी तक कहीं भी फसल को नुकसान होने की खबर नहीं है क्योंकि मौसम काफी हद तक ठंडा बना हुआ था। वैसे इस बार लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्रफल में ऐसी किस्मों के गेहूं के बीज की बोआई हुई है जिसमें ऊंचे तापमान को बर्दाश्त करने की अधिक क्षमता है। लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है।

गेहूं की बिजाई पहले ही समाप्त हो चुकी है और इसका उत्पादन क्षेत्र पिछले सीजन के 328.04 लाख हेक्टेयर के रिकॉर्ड स्तर से भी 6.13 लाख हेक्टयर बढ़कर इस बार 334.17 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। इससे एक बार फिर इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का शानदार उत्पादन होने की उम्मीद है।

लेकिन इसके लिए फरवरी एवं  मार्च का मौसम फसल के लिए अनुकूल होना आवश्यक है। 16-20 फरवरी के दौरान होने वाली वर्षा से फसल को फायदा होगा लेकिन इसके साथ यदि ओलावृष्टि भी हो गई तो इससे नुकसान की आशंका उत्पन्न हो सकती है।