गेहूं खरीद का परिदृश्य

02-May-2026 12:36 PM

इस वर्ष 30 अप्रैल तक केन्द्रीय पूल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 232.50 लाख टन गेहूं खरीदा गया जो पिछले साल की इसी अवधि की खरीद 256.30 लाख टन से करीब 9 प्रतिशत ज्यादा है। एक तरफ पंजाब और हरियाणा में गेहूं की जोरदार खरीद हो रही है तो दूसरी ओर मध्य प्रदेश में खरीद की स्थिति निराशाजनक तथा राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में कमजोर देखी जा रही है। दिलचस्पी तथ्य यह है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद का लक्ष्य बढ़ाया गया है जबकि हरियाणा में वास्तविक खरीद नियत लक्ष्य से काफी आगे निकल चुकी है लेकिन फिर भी वहां लक्ष्य में वृद्धि की अभी तक घोषणा नहीं हुई है। पंजाब में खरीद की स्थिति गत वर्ष से काफी बेहतर है और इसका आंकड़ा 100 लाख टन के पार पहुंच चुका है। वहां 15 मई तक गेहूं की खरीद होनी है और उम्मीद की जा रही है कि इस तिथि तक गेहूं की कुल सरकारी खरीद 122 लाख टन के नियत लक्ष्य तक या उससे ऊपर पहुंच जाएगी। हरियाणा में 72 लाख टन के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 76.60 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है जो गत वर्ष की समान अवधि की मात्रा 65.70 लाख टन से 17 प्रतिशत अधिक है। 

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद का परिदृश्य संतोषजनक नहीं है। वहां खरीद का लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन निर्धारित किया गया है जबकि 30 अप्रैल 2026 तक वहां केवल 27.50 लाख टन की खरीद संभव हो सकी जो गत वर्ष की समान अवधि की खरीद 67.68 लाख टन से 59 प्रतिशत कम है। राजस्थान में भी गेहूं की खरीद गत वर्ष से काफी पीछे चल रही है जबकि उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे पिछले साल के करीब पहुंच रही है। सरकारी गोदामों में पहले से ही गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है इसलिए मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन में यदि खरीद 5-10 प्रतिशत कम होती है तब भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई संकट पैदा नहीं होगा। सरकार 50 लाख टन साबुत गेहूं एवं 10 लाख टन मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे चुकी है मगर निर्यात के मोर्चे पर प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद कम है।