गेहूं की सरकारी स्टॉक 5 साल के शीर्ष स्तर पर पहुंचा
04-May-2026 12:33 PM
नई दिल्ली। हालांकि गत वर्ष के मुकाबले चालू रबी मार्केटिंग सीजन में केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद कुछ पीछे चल रही है लेकिन पिछला बकाया स्टॉक ज्यादा होने से उसका कुल भंडार बढ़कर पिछले पांच साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है जो इस अवधि के लिए नियत न्यूनतम आवश्यक बफर स्टॉक से भी करीब तीन गुणा ज्यादा है। गेहूं की सरकारी खरीद अभी जारी है।
प्राइवेट फर्मों द्वारा गेहूं की खरीद में सावधानी दिखाई जा रही है क्योंकि उसे पिछले सीजन में स्टॉक सीमा की वजह से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 360 लाख टन पर पहले ही पहुंच चुका है जबकि खरीद की प्रक्रिया जारी रहने से आगामी समय में स्टॉक का स्तर और भी ऊंचा उठ सकता है। इससे इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण में कठिनाई पैदा होने की आशंका है। सरकारी गोदामों में चावल का विशाल भंडार पहले से ही उपलब्ध है।
गेहूं की सरकारी खरीद का अभी पहला महीना ही समाप्त हुआ है जबकि मई और जून में भी खरीद की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है। मई को केन्द्रीय पूल में कम से कम 74.60 लाख टन गेहूं का स्टॉक उपलब्ध रहना आवश्यक है जबकि इसका वास्तविक भंडार बढ़कर 360 लाख टन पर पहुंच गया। यह भंडार 1 जुलाई 2026 के लिए आवश्यक मात्रा 275.80 लाख टन से भी काफी अधिक है। इतना ही नहीं बल्कि गेहूं का मौजूदा स्टॉक 1 मई 2021 के बाद सबसे ऊंचा है।
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गेहूं की बिक्री कम होने से सरकारी स्टॉक काफी बढ़ गया। समझा जाता है कि आगामी दिनों में सरकारी एजेंसियों 80 से 100 लाख टन के बीच गेहूं की अतिरिक्त खरीद कर सकती हैं जिससे इसका स्टॉक काफी बढ़ सकता है। ध्यान देने की बात है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 180 से 200 लाख टन के बीच गेहूं का वार्षिक वितरण होता है।
