रूई पर आयात शुल्क में कटौती पर मध्यम मार्ग अपनाने का सुझाव
04-May-2026 04:04 PM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय ने रूई पर लगे आयात शुल्क को समाप्त करने और उद्योग को दिसम्बर 2026 तक इससे शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने का आग्रह किया है लेकिन कृषि मंत्रालय फिलहाल इसके पक्ष में नहीं है और मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दे रहा है। कृषि मंत्रालय का कहना है कि यदि अभी रूई के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति दी गई तो किसानों में गलत संदेश जाएगा और कपास की खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण घट जाएगा।
मंत्रालय के मुताबिक मध्यम मार्ग के तहत विकल्प यह है कि सितम्बर-अक्टूबर में रूई पर आयात शुल्क को कम या खत्म किया जाना चाहिए क्योंकि फिलहाल अगस्त तक की घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए देश में रूई का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। दूसरा विकल्प यह है कि रूई पर आयात शुल्क को 11 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से घटाकर 6-7 प्रतिशत नियत किया जाए।
कृषि मंत्रालय को जानकारी मिली है कि सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के पास करीब 47 लाख गांठ रूई का स्टॉक मौजूद है जबकि किसान, व्यापारियों एवं प्रोसेसर्स के पास मौजूद स्टॉक को मिलाने पर कम से कम अगस्त तक की मांग पूरी हो सकती है। विदेशों से रूई का आयात पहले से ही हो रहा है इसलिए समस्या केवल इसके ऊंचे घरेलू भाव की है।
अक्टूबर से इसके नए माल की आवक शुरू हो जाएगी इसलिए उसके ठीक पहले सरकार को फसल की स्थिति के आधार पर कोई निर्णय लेना चाहिए। पंजाब में कपास की बिजाई अंतिम चरण में है जबकि अगले महीने से देश के अन्य सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में बिजाई आरंभ हो जाएगी।
