गेहूं का निर्यात खोले जाने की संभावना धूमिल
09-Feb-2026 04:07 PM
नई दिल्ली। हालांकि चालू वर्ष के दौरान उत्पादन एवं ऊंचे स्टॉक को देखते हुए सरकार ने गेहूं पर भंडारण सीमा के आदेश को वापस ले लिया है और 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दे दी है लेकिन गेहूं के व्यापारिक निर्यात की स्वीकृति दिए जाने का मामला खटाई में पड़ सकता है।
दरअसल इस वर्ष जून-जुलाई में अल नीनो मौसम चक्र के आने और सक्रिय होने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिससे खरीफ फसलों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए सरकार को घरेलू प्रभाग में खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता बरकरार रखने की आवश्यकता पड़ेगी।
चालू रबी सीजन में गेहूं का बिजाई क्षेत्र 6.13 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ 334.17 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचना है और जनवरी 2026 तक मौसम भी फसल के लिए काफी हद तक अनुकूल बना रहा।
लेकिन फरवरी-मार्च में बारिश कम होने और तापमान ऊंचा रहने की संभावना व्यक्त की गई है जिससे फसल के लिए समस्या बढ़ सकती है।
हालांकि एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा गेहूं का निर्यात खोलने के विषय पर चर्चा की गई थी और ऐसा लग रहा था कि सरकार इस सम्बन्ध में सकारात्मक निर्णय ले सकती है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसकी संभावना धूमिल पड़ गई है।
अब सरकार कम से कम मार्च तक इंतजार कर सकती है। फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए महत्वपूर्ण होता है।
मई 2022 से ही गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है और 2024-2025 में 1179.40 लाख टन के रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन के बावजूद इसके निर्यात की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि सरकार को इसका घरेलू बाजार भाव ऊंचा एवं तेज होने का डर सता रहा था।
