गेहूं की आवक के मुकाबले सरकारी खरीद बहुत कम

22-Apr-2026 05:12 PM

नई दिल्ली। मार्च के अंतिम एवं अप्रैल के प्रथम सप्ताह के दौरान तेज हवा के प्रवाह के साथ बेमौसमी बारिश तथा कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने से गेहूं फसल को न केवल नुकसान हुआ बल्कि इसकी कटाई-तैयारी में बाधा भी पड़ी।

इसके फलस्वरूप मंडियों में तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर 20 अप्रैल 2026 तक 157.88 लाख टन गेहूं पहुंचा जिसमें से 114.29 लाख टन की खरीद भारतीय खाद्य निगम एवं प्रांतीय एजेंसियों द्वारा की गई।

पिछले साल की तिथि तक 194.16 लाख टन गेहूं की आवक हुई थी और उसमें से 135.52 लाख टन गेहूं सरकारी एजेंसियों ने खरीदा था। इस तरह गेहूं की कुल आवक तथा सरकारी खरीद गत वर्ष की तुलना में इस बार काफी पीछे चल रही है। 

केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद पिछले साल की तुलना में इस बार पंजाब में 29.88 लाख टन से उछलकर 46.28 लाख टन तथा हरियाणा में 47.08 लाख टन से बढ़कर 53.70 लाख टन पर पहुंच गयी लेकिन उत्तर प्रदेश में 4.54 लाख टन से गिरकर 2.75 लाख टन, मध्य प्रदेश में 47.15 लाख टन से लुढ़ककर 7.26 लाख टन और राजस्थान में 6.75 लाख टन से घटकर 4.01 लाख टन पर अटक गई।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय पूल में ये पांचों राज्य मिलकर 95 प्रतिशत से अधिक गेहूं का योगदान देते हैं। यद्यपि बिहार, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ एवं जम्मू कश्मीर में भी गेहूं की सरकारी खरीद होती है लेकिन वहां इसकी मात्रा सीमित रहती है।

केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने इस वर्ष 303.37 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत पंजाब में 122 लाख टन, मध्य प्रदेश में 78 लाख टन, हरियाणा में 72 लाख टन, राजस्थान में 21 लाख टन एवं उत्तर प्रदेश में 10 लाख टन की खरीद का लक्ष्य शामिल है। गेहूं खरीद की गति आगे तेज हो सकती है।