गन्ना नियंत्रण आदेश हेतु संशोधन का प्रारूप जारी
22-Apr-2026 05:59 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में कुछ संशोधन करने का प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी किया है। इसी आदेश से सम्पूर्ण गन्ना एवं चीनी क्षेत्र का नियंत्रण एवं संचालन होता है। नए प्रारूप में किसी दो चीनी मिलों के बीच कम से कम 25 कि०मी० का अंतर (फासला) रखने और खांडसारी इकाइयों को गन्ना उत्पादकों को केन्द्र द्वारा निर्धारित उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ-साथ खांडसारी इकाइयों को रेग्युलेट करने पर भी इस ड्राफ्ट में जोर दिया गया है। इसके तहत इन इकाइयों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जाएगा और उसे नियमित जांच-पड़ताल एवं निरीक्षण के दायरे में लाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि खांडसारी एक परम्परागत गैर रिफाइंड कच्ची चीनी होती है जिसे गन्ना से बनाया जाता है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि सम्बन्धित पक्षों को अपनी राय एवं टिप्पणी 20 मई तक सरकार के पास भेजना आवश्यक है।
मोटे अनुमान के अनुसार देश में प्रतिवर्ष औसतन 43-45 करोड़ टन गन्ना का उत्पादन होता है जिसमें से लगभग 31 प्रतिशत का उपयोग गुड़-खांडसारी इकाइयों द्वारा किया जाता है। यह मात्रा काफी बड़ी होती है इसलिए सरकार इसके उपयोग को अवस्थित करना चाहती है और खांडसारी इकाइयों पर नजर भी रखना चाहती है।
जहां तक दो चीनी मिलों के बीच की दूरी का सवाल है तो महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य राज्यों में यह अनिवार्य नियम पहले से ही लागू है।
संशोधन के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव भी किया गया है कि यदि चीनी मिल गन्ना की प्राप्ति के बाद 14 दिन के अंदर उसके मूल्य का भुगतान नहीं करती है तो उसे गन्ना किसानों को 14 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।
