गेहूं बाजार में सरकार की स्थिति मजबूत, भविष्य में हस्तक्षेप की संभावना बढ़ी
19-May-2026 12:03 PM
गेहूं बाजार में सरकार की स्थिति मजबूत, भविष्य में हस्तक्षेप की संभावना बढ़ी
चालू रबी विपणन सीजन 2026-27 में गेहूं की सरकारी खरीद और उपलब्ध स्टॉक के आंकड़ों को देखते हुए यह साफ संकेत मिल रहा है कि केंद्र सरकार फिलहाल काफी आरामदायक स्थिति में दिखाई दे रही है। बढ़ती सरकारी खरीद, भारी मात्रा में URS गेहूं की आवक और आगामी धान सीजन के लिए भंडारण क्षमता की जरूरत को देखते हुए आने वाले महीनों में सरकार बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप कर सकती है।
वर्तमान स्टॉक स्थिति (लाख टन में)
1 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक गेहूं स्टॉक: 217.92
8 मई 2026 तक सरकारी खरीद: 323
कुल उपलब्ध स्टॉक: 540.92
यदि पिछले वर्षों के आवंटन के आधार पर PDS एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए लगभग 220 लाख टन गेहूं अलग रखा जाए और 75 लाख टन का बफर स्टॉक बनाए रखा जाए, तब भी सरकार के पास लगभग 245.92 लाख टन गेहूं उपलब्ध रह सकता है। यह मात्रा बाजार हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
URS गेहूं बना सबसे बड़ा फैक्टर
इस वर्ष सरकारी खरीद में सबसे बड़ा बदलाव URS गेहूं की भारी हिस्सेदारी है। अब तक खरीदे गए 323 लाख टन गेहूं में लगभग URS गेहूं 228 लाख टन और FAQ गेहूं की 95 लाख टन है।
मध्य प्रदेश द्वारा अभी URS स्टॉक का अंतिम आंकड़ा घोषित नहीं किया गया है। यदि अनुमानित रूप से राज्य में 75 लाख टन अतिरिक्त URS स्टॉक मान लिया जाए, तो कुल URS उपलब्धता करीब 300 लाख टन तक पहुंच सकती है।
यानी PDS एवं अन्य योजनाओं के लिए यदि लगभग 200 लाख टन गेहूं उपयोग में लिया जाए, तब भी पर्याप्त मात्रा में स्टॉक शेष रह सकता है, जिसे बाजार स्थिरीकरण या OMSS बिक्री में इस्तेमाल किया जा सकता है।
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की हालिया क्रॉप एस्टीमेट बैठक में मंत्रालय की ओर से यह संकेत दिया गया कि URS गेहूं की बिक्री को प्राथमिकता दी जाएगी। यह रणनीति पारंपरिक “First In First Out (FIFO)” मॉडल से हटकर “Last In First Out (LIFO)” जैसी स्थिति बनाती दिख रही है।
सरकार की प्राथमिकता फिलहाल स्पष्ट नजर आ रही है जिसे कि गोदामों में जगह खाली करना, आगामी धान खरीद सीजन के लिए स्टोरेज तैयार रखना, CMR के आने वाले स्टॉक्स के लिए क्षमता बनाना और URS गेहूं को पहले निकालकर गुणवत्ता जोखिम कम करना होगा।
उपलब्ध आंकड़ों और मौजूदा सरकारी रणनीति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि खाद्य मंत्रालय फिलहाल “कम्फर्ट जोन” में है। यदि आने वाले समय में गेहूं कीमतों में तेज तेजी बनती है, तो सरकार OMSS बिक्री या अन्य माध्यमों से बाजार में हस्तक्षेप कर सकती है।
वर्तमान परिस्थितियों में गेहूं बाजार के सभी हितधारकों — विशेषकर स्टॉकिस्ट, ट्रेडर्स और मिलर्स — को सतर्क रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। सरकारी स्टॉक स्थिति मजबूत होने के कारण केवल तेजी की धारणा पर बड़े स्तर की पोजिशन बनाना जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है।
निकट भविष्य में बाजार का रुख काफी हद तक सरकारी बिक्री नीति, OMSS निर्णय और मानसून प्रगति पर निर्भर करेगा।
