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14-Oct-2026 04:24 PM
नई दिल्ली। सरकारी आश्वासन एवं प्रोत्साहन के सहारे भारत में पिछले कुछ वर्षों से एथनॉल निर्माण उद्योग का तेजी से विकास-विस्तार हो रहा है और इसके उत्पादन की क्षमता काफी बढ़ रही है लेकिन उसके अनुरूप एथनॉल की मांग एवं खपत में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। इसके फलस्वरूप डिस्टीलरीज को अपनी सकल संचित उत्पादन क्षमता का उपयोग करने का अवसर नहीं मिल रहा है।
एथनॉल की मांग एवं आपूर्ति में भारी असंतुलन होने से निर्माताओं की कठिनाई बढ़ती जा रही है। अनाज पर आधारित डिस्टीलरीज की हालत तो कुछ हद तक संतोषजनक है मगर गन्ना अवयवों का इस्तेमाल करने वाली चीनी मिलों / डिस्टीलरीज की स्थिति खराब होती जा रही है।
इस वर्ष (2026-27 में) इन डिस्टीलरीज को कच्चे माल के भारी अभाव का संकट भी झेलना पड़ सकता है क्योंकि गन्ना की कमजोर पैदावार तथा चीनी उत्पादन में वृद्धि की आवश्यकता को देखते हुए सरकार एथनॉल निर्माण में गन्ना जूस / सीरप एवं बी-हैवी शीरा के इस्तेमाल को रोकने पर विचार कर रही है।
पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का स्तर बढ़ाने पर सरकार को काफी सावधानी से निर्णय लेना पड़ेगा क्योंकि इस पर कुछ विवाद उत्पन्न हो गया है। चीनी के ऊंचे भाव एवं बेहद कम स्टॉक को देखते हुए सरकार कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।