एक्स्ट्रा लांग स्टेपल कॉटन पर सीमा शुल्क समाप्त करने का निर्णय

09-Feb-2026 08:36 PM

मुम्बई। भारत सरकार ने एस्क्ट्रा लांग स्टेपल (अतिरिक्त लम्बे रेशे) की रूई की प्रथम अनुसूची में शामिल करने का निर्णय लिया है जिससे इसके आयात पर प्रभावी सीमा शुल्क घटाकर शून्य प्रतिशत रह जाएगा।

इससे भारतीय निर्यातकों को ऊंची कीमत वाले वस्त्र उत्पादों एवं परिधानों का निर्यात बढ़ाने में अच्छी सहायता मिलने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026-27 के केन्द्रीय आम बजट में सरकार ने एक्सट्रा लांग स्टेपल (ईएलएस) रूई को ऐसी अनुसूची में शामिल करने की घोषणा की है जिसमें शून्य शुल्क वाले उत्पादों को रखा गया है। 

एक अग्रणी उद्योग-व्यापार संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के चेयरमैन का कहना है कि केन्द्रीय आम बजट को भविष्य में एक विकासोन्मुखी ब्लू प्रिंट की तरह तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करना और संसार की तीसरी सबसे बढ़ी अर्थ व्यवस्था बनाने का आधार तैयार करना है।

कस्टम अनुसूची में किए गए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के तहत ईएलएस कॉटन को प्रथम अनुसूची में सम्मिलित किया गया है।

इससे भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को ईएलएस रुई का शुल्क मुक्त सस्ता आयात और उपयोग करने का अवसर प्राप्त होगा और इससे निर्मित उच्च क्वालिटी के वस्त्र परिधानों की प्रतिस्पर्धी क्षमता अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ जाएगी।

उल्लेखनीय है कि भारत में इस उच्च क्वालिटी की रूई का सीमित उत्पादन होता है जो घरेलू उद्योग की मांग एवं जरूरत को पूरा करने में सफल नहीं होता है और इसलिए विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता बनी रहती है। 

ध्यान देने की बात है कि भारत में प्रति वर्ष 5-7 लाख गांठ ईएलएस कॉटन मंगाया जाता है और इसका आयात मुख्यतः अमरीका तथा मिस्र से होता है।