चीनी का उत्पादन घटने से आपूर्ति की जटिलता बढ़ने की आशंका

13-Jan-2025 06:07 PM

नई दिल्ली । शुरूआती चरण में सूखा और फिर अत्यधिक वर्षा तथा बाढ़ के प्रकोप से गन्ना की फसल को कई क्षेत्रों में भारी नुकसान होने से 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में चीनी का घरेलू उत्पादन घटने की आशंका है जिससे इसकी आपूर्ति में जटिलता बढ़ सकती है और इसके व्यपारिक निर्यात को खोलने का निर्णय लेने में सरकार को कठिनाई हो सकती है। 

उद्योग विश्लेषकों के अनुसार मौसम की प्रतिकूल स्थिति तथा रेड रोट बीमारी के प्रकोप से इस बार गन्ना फसल की उपज दर में गिरावट देखी जा रही है जबकि कुछ क्षेत्रों में फसल काटने में भी किसानों को कठिनाई एवं चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

रेड रोट फंगल कीट की वजह से गन्ना की फसल प्रभावित हो रही है जिससे पैदावार में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं।

आमतौर पर गन्ना की औसत उत्पादकता दर 120-130 टन प्रति हेक्टेयर रहती है लेकिन इस बार महज 80 टन प्रति हेक्टेयर के आसपास देखी जा रही है। 

चीनी का उत्पादन चालू मार्केटिंग सीजन में घटकर घरेलू खपत से नीचे आने का अनुमान लगाया जा रहा है जिससे इसके निर्यात की अनुमति देना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

यह सही है कि उद्योग के पास 20-25 लाख टन चीनी का अधिशेष स्टॉक बचा हुआ था लेकिन पहले यह देखना आवश्यक होगा कि इस बार घरेलू उत्पादन किस स्तर तक पहुंचता है।

चीनी का वैश्विक बाजार भाव मुख्यत: ब्राजील के उत्पादन पर निर्भर करता है जबकि थाईलैंड तथा यूरोपीय संघ से होने वाला निर्यात भी इसकी कीमतों पर असर डालता है।

ऐसा प्रतीत होता है कि 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में भारत से चीनी का निर्यात बंद रखने पर ही इसके आयात की संभावना खत्म हो सकती है।

चीनी का वैश्विक बाजार भाव ऊंचे स्तर पर बरकरार रह सकता है। भारत को अपनी आंतरिक मांग एवं जरूरत को पूरा करने में विशेष कठिनाई नहीं होनी चाहिए। 

भारत में चीनी का उत्पादन खर्च काफी बढ़ गया है लेकिन इसके अनुरूप एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में इजाफा नहीं होने से मिलर्स की परेशानी बढ़ गई है।