चीनी के निर्यात कोटे में हुई वृद्धि से उद्योग को ज्यादा राहत नहीं
16-Feb-2026 03:55 PM
नई दिल्ली। बेशक केन्द्र सरकार ने उद्योग संगठनों की मांग को स्वीकार करते हुए 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के लिए चीनी का निर्यात कोटा 5 लाख टन बढ़ाते हुए इसे 15 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन निर्धारित कर दिया है लेकिन घरेलू एवं वैश्विक बाजार की स्थिति को देखते हुए उद्योग को इस अतिरिक्त निर्यात कोटे का समुचित फायदा मिलने में संदेह है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार की तुलना में चीनी का घरेलू बाजार भाव ऊंचा चल रहा है और अप्रैल से ब्राजील में नई चीनी का उत्पादन जोर पकड़ने की संभावना है। इसके बाद वैश्विक बाजार मूल्य पर दबाव और भी बढ़ सकता है।
ब्राजील दुनिया में चीनी का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है और चीनी के वैश्विक बाजार मूल्य को निर्धारित करने में उसका सर्वाधिक योगदान रहता है। वहां 2025-26 सीजन के दौरान चीनी का विशाल उत्पादन हुआ जिससे इसकी कीमतों पर भारी दबाव बना रहा। इसके फलस्वरूप भारत से पिछले सीजन में चीनी का निर्यात 10 लाख टन के नियत कोटे तक भी नहीं पहुंच सका।
हालांकि 2026-27 के सीजन में ब्राजील के मध्य दक्षिणी भाग में चीनी का उत्पादन कुछ घटने का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन फिर भी वैश्विक उत्पादन इसके कुल उपयोग से ज्यादा होने की उम्मीद है। इसके फलस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य में ज्यादा तेजी आने में संदेह है। थाईलैंड, चीन एवं यूरोपीय संघ में भी चीनी का उत्पादन भारत की भांति बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चीनी के अतिरिक्त निर्यात कोटे के वितरण के लिए एक खास शर्त रखी गई है। इसके तहत जो मिलर्स 14 नवम्बर 2025 को आवंटित मूल निर्यात कोटे के कम से कम 70 प्रतिशत भाग का शिपमेंट जून 2026 के अंत तक पूरा कर लेंगे केवल उसे ही अतितिक्त कोटा आवंटित किया जाएगा जिसका शिपमेंट 30 सितम्बर 2026 तक करने की अनुमति दी जाएगी। वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी निर्यातकों को ज्यादा 'पड़ता' (पैरिटी) नहीं बैठ रहा है इसलिए नए कोटे का आवंटन खटाई में पड़ सकता है।
