अमरीका से रूई के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय
16-Feb-2026 04:36 PM
नई दिल्ली। किसान संगठनों का कहना है कि अमरीका से शून्य शुल्क पर रूई का आयात आरंभ होने पर घरेलू बाजार भाव घटकर काफी नीचे आ सकता है जिससे उत्पादकों को काफी नुकसान होगा। समझा जाता है कि अमरीका ने बांग्ला देश से कहा है कि यदि वह अमरीकी रूई से निर्मित उत्पादों को अमरीकी बाजार में बेचेगा तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।
इधर भारत के केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री ने भी कहा है कि भारत के साथ भी यही नीति लागू होगी। यदि भारत अमरीका से रूई खरीद कर घरेलू प्रभाग में उसकी प्रोसेसिंग करेगा और उससे कपड़ा तैयार करके अमरीका को उसका निर्यात करेगा तो उस पर भी शून्य शुल्क का लाभ मिल सकता है।
दूसरी ओर किसान संगठनों ने कहा है कि सरकार ने इस तरह का कदम उठाकर स्वदेशी कपास उत्पादकों के हितों की अनदेखी कर दी है। बांग्ला देश में कपास का नगण्य उत्पादन होता है इसलिए उसे विदेशों से इसका विशाल आयात करना पड़ता है और उसके किसानों को कोई नुकसान नहीं होता है।
दूसरी ओर भारत दुनिया में कपास के उत्पादन में पहले या दूसरे नम्बर पर रहता है। यदि यहां विशाल मात्रा में अमरीकी रूई का आयात शुरू हुआ तो स्वदेशी उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा था कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जबकि अमरीका में भारत और बांग्ला देश के लिए वस्त्र उत्पादों के आयात पर समान शुल्क नीति लागू होगी।
लेकिन केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री के इस तर्क से कपास उत्पादकों का संगठन संतुष्ट नहीं है और इसने इसका विरोध करने का निर्णय लिया है। पंजाब के फाजिल्का जिले में उच्च क्वालिटी की कपास का उत्पादन होता रहा है। पिछले एक दशक से वहां रूई का भाव और उत्पादन घट रहा है जबकि केन्द्र के नए निर्णय से उत्पादन पूरी तरह ठप्प पड़ जाने की आशंका है।
