चीनी का भविष्य सरकार के हाथ में

03-Jan-2025 10:50 AM

चीनी का भविष्य सरकार के हाथ में
★ इस्मा और NFCSF के अनुसार इस वर्ष चीनी उत्पादन गत वर्ष से रहेगा कमजोर। एथनोल में चीनी की खपत भी बढ़ सकती है।
★ सभी राज्यों में किसी न किसी कारण से उत्पादन घटा, उत्तर प्रदेश में रोग लगने, महाराष्ट्र व कर्नाट में बारिश से हुआ नुकसान।
★ जनवरी के अंत में इस्मा द्वारा फसल रिपोर्ट दी जाएगी, आई ग्रेन इंडिया का मानना है कि चीनी उत्पादन में और कमी बताई जा सकती है।
★ दिल्ली में आयोजित मीटिंग में इस्मा ने खाद्य मंत्रालय से कम से कम 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति मांगी क्योंकि पुराना स्टॉक भी अच्छा है।
★ पुराने स्टॉक का हवाला देते हुए आयात की मंजूरी मांगी गयी परन्तु दूसरी ओर एथनोल में भी चीनी का इस्तमाल बढ़ रहा है।
★ एक तरफ उत्पादन में गिरावट संभावित दूसरा एथनोल में खपत बढ़ने के बाद निर्यात खोलने का सरकार रिस्क क्यों लेगी।
★ सरकार जरुर चाहेगी कि अतिरिक्त स्टॉक का इस्तमाल एथनोल बनाने में हो जिससे ब्लेंडिंग प्रोग्राम सफल हो।
★ घटते उत्पादन को देख धीरे-धीरे 3 महीने में बिक्री कोटा भी घटाया गया।
★ पहले चीनी बाजार पूरी तरह मासिक कोटा पर निर्भर थे जो अब निर्यात फैसले पर भी निर्भर होने लगे।
★ आई ग्रेन इंडिया का मानना है कि निर्यात खोले जाने की उम्मीद बेहद कम, अगर खुला भी तो अधिकतर 5-8 लाख टन की अनुमति दी जा सकती है।
★ सरकार ने बड़ी मुश्किल से चीन की कीमतों को संभाले रखा और जरुर चाहेगी कि कीमतें नियंत्रण में रहे।
★ चीनी उद्योग ही ऐसा उद्योग है जिमें सरकार गन्ना फसल की FRP, चीनी की कीमतें, मोलासिस की कीमतें, एथनोल की कीमतें, अन्य उत्पादों की कीमतें निर्धारित करती है। मिलों के हाथ में केवल गन्ना से चीनी बनाकर बेचना रहा।
★ परन्तु इस मध्यस्थता के साथ-साथ सरकार ने मिलों को एथनोल प्रोग्राम के तहत पूरा सपोर्ट भी किया जिससे समय पर हो रहा है गन्ना का भुगतान और एथनोल ब्लेंडिंग के कारण कई मिलों की वित्तीय हालत में भी आया सुधार।