बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर घटकर 30 प्रतिशत से नीचे आया

05-Jun-2026 08:14 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर घटकर उसकी कुल भंडारण क्षमता के 30 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है। लगभग 80 प्रतिशत जलाशय पानी से आधे खाली हो चुके हैं। हालांकि अब दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है लेकिन यह अपनी नियत तिथि 1 जून से तीन दिन पीछे रह गया। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक घटकर गत वर्ष के स्तर से नीचे आ गया है मगर दस वर्षीय औसत स्तर से कुछ ऊंचा है। 

आयोग की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार इन 166 बांधों-जलाशयों में केवल 54.726 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 183.564 बीसीएम का 29.81 प्रतिशत है। गत वर्ष की समान अवधि में 58.303 बीसीएम पानी का स्टॉक मौजूद था जबकि इसका दस वर्षीय औसत स्तर 46.152 बीसीएम आंका गया है। 

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश के सभी भागों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो वर्षा पर आश्रित इलाकों के साथ-साथ सिंचित क्षेत्रों में ही खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और साथ ही साथ आगामी रबी सीजन में भी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी। 

आयोग के आंकड़ों के अनुसार देश के पूर्वी एवं दक्षिण संभाग के बांधों-सरोवरों में पानी का स्तर घटकर 25 प्रतिशत से नीचे आ गया है जो गंभीर चिंता का विषय है।

इन दोनों संभागों में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है जिसे सिंचाई के लिए सबसे ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। देश के पश्चिमी संभाग में भी जल स्तर गिरकर 35 प्रतिशत से नीचे आ गया है। वहां दलहन, तिलहन, कपास और गन्ना का ज्यादा उत्पादन होता है।

मौसम विभाग के मुताबिक इस वर्ष जनवरी-मई के पांच महीनों के दौरान देश के अधिकांश भाग में वर्षा सामान्य औसत से कम या बहुत कम हुई जिससे न केवल बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर घट गया बल्कि खेतों की मिटटी से नमी भी गायब हो गई है।