बासमती चावल के रिकॉर्ड निर्यात में सरकारी नीतियों का महत्वपूर्ण योगदान

24-May-2024 03:39 PM

नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से बासमती चावल का निर्यात तेजी से उछलकर 52.40 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर  पहुंच गया जो 2022-23 के शिपमेंट 45.60 लाख टन से काफी अधिक था। बासमती चावल का औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा रहने से आमदनी में भी भारी बढ़ोत्तरी हुई।

लेकिन अब बासमती के दाम में 10-15 प्रतिशत की कमी आ गई है। ऑल इण्डिया राईस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन (ऐरिया) के महामंत्री का कहना है कि सरकार को बासमती चावल के लिए नियत 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) को हटा लेना चाहिए और इसमें निर्यात संवर्धन हेतु अपनी सकारात्मक नीतियों को बरकरार रखना चाहिए।

हालांकि अगस्त 2023 में बासमती चावल के लिए 1200 डॉलर प्रति टन का मेप निर्धारित किया गया था मगर कुछ महीनो के अंदर ही इसे घटाकर 950 डॉलर प्रति टन नियत कर दिया गया।

एसोसिएशन का कहना है कि सरकार की सार्थक एवं अनुकूल नीति के कारण ही बासमती चावल का निर्यात नए रिकार्ड स्तर पर पहुंच सका। आप चुनाव के बाद चावल निर्यात के मोर्चे पर सरकार से अच्छी नीति की उम्मीद की जा रही है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार यूरोपीय संघ में पाकिस्तानी बासमती चावल की खेपो को बार-बार नामंजूर करके वापस भेजा जा रहा है क्योंकि वहां न्यूनतम अवशेष स्तर के नियमो का उललंघन हो रहा है।

यूरोपीय संघ में भारतीय बासमती चावल का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि वहां उसे जी आई टैग प्रदान करने की प्रक्रिया चल रही है इससे निर्यात में 5 लाख टन का इजाफा हो सकता है हाल के दिनों में बासमती चावल का भाव कुछ नरम पड़ा है मगर जोरदार निर्यात मांग निकलने पर इसमें पुनः तेजी आ सकती है। 

पश्चिम एशिया एवं खाड़ी क्षेत्र के देशो में भारतीय बासमती चावल का सर्वाधिक निर्यात होता है। वहां आगामी महीनो में इसकी अच्छी मांग निकलने की उम्मीद है।

सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, कतर, बहरीन, जॉर्डन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यू ए ई) में बासमती चावल का आयात ज्यादा होता है। शानदार निर्यात होने से भारतीय किसानो को बासमती धान का ऊंचा मूल्य प्राप्त हुआ जिससे उसकी आमदनी बढ़ गई।