भारतीय बासमती चावल की निर्यात मांग मजबूत रहने की उम्मीद

23-May-2024 06:19 PM

नई दिल्ली । चालू वर्ष के दौरान एक बार फिर भारतीय बासमती चावल की निर्यात मांग काफी मजबूत रहने की संभवना है जो बिजाई की प्रक्रिया शुरू होने से पूर्व बासमती धान के उत्पादकों के लिए बहुत अच्छी खबर है।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत से रिकॉर्ड मात्रा में इस प्रीमियम क्वालिटी के सुगन्धित चावल का निर्यात हुआ था और ऊंचे ऑफर मूल्य के कारण इसकी निर्यात आय भी शीर्ष स्तर पर पहुंच गई थी। इससे किसानों को भी बासमती धान का काफी ऊंचा मूल्य प्राप्त हुआ था और उसकी आमदनी में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई थी। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में देश से 45.60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था जो 2023-24 में 15 प्रतिशत बढ़कर 52.40 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह बासमती चावल की निर्यात आमदनी विदेशी मुदा में 4.78 अरब डॉलर से उछलकर 5.83 अरब डॉलर तथा भारतीय मुद्रा में 38,525 करोड़ रुपए से बढ़कर 48,389 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इस अवधि में बासमती चावल के फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य में भी काफी इजाफा दर्ज किया गया।

कीटनाशकों के उच्चतम अवशेष स्तर (एमआरएल) के नियमों पर खरा नहीं उतरने के कारण यूरोपीय संघ में पाकिस्तानी बासमती चावल की अनेक खेपों को नामंजूर किया जा रहा है जबकि वहां भारतीय बासमती चावल को भौगोलिक संकेतक का दर्जा (जीआईटैग) प्रदान करने की तैयारी चल रही है।

इसके फलस्वरूप वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से बासमती चावल के निर्यात में 5 लाख टन तक की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।

ध्यान देने की बात है कि भारत से यूरोपीय संघ को वित्त वर्ष 2022-23 में 1,64,138 टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था जो 2023-24 में घटकर 1,52,881 टन रह गया। इसी तरह निर्यात आमदनी भी 21.097 करोड़ डॉलर से गिरकर 16.681 करोड़ डॉलर पर अटक गई। 

पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनैतिक परिदृश्य से संकेत मिलता है कि वहां आगामी सीजन के दौरान बासमती चावल का आयात बढ़ेगा और इसके साथ-साथ यूरोप में भी इसके निर्यात के उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। सऊदी अरब तथा इराक सहित खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में भारतीय बासमती चावल को काफी पसंद किया जाता है।