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05-Nov-2026 08:30 PM
नई दिल्ली। एक अग्रणी निर्यातक संस्था- इंडियन राइस एक्सपोटर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने आगाह किया है कि यदि 100 प्रतिशत टूटे (टुकड़ी) चावल की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बरकरार रहा तो सरकार इसका निर्यात रोकने पर विचार कर सकती है। इस टुकड़ी चावल का वैश्विक बाजार भाव उछलकर 360 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गया है।
दरअसल चावल की खरीद के लिए विदेशी आयातकों एवं स्वदेशी खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। घरेलू प्रभाग में खासकर एथनॉल निर्माताओं एवं पॉल्ट्री फीड उद्योग द्वारा भारी मात्रा में 100 प्रतिशत टूटे चावल की खरीद की जा रही है। इसी तरह वैश्विक स्तर पर अफ्रीकी देशों में इस चावल की जोरदार मांग निकल रही है।
घरेलू प्रभाग में टुकड़ी चावल का दाम लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि कीमतों में नरमी या स्थिरता नहीं आई तो केन्द्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। सोयामील एवं मक्का के ऊंचे दाम से उपभोक्ता उद्योगों की परेशानी पहले ही बढ़ चुकी है जबकि अब टुकड़ी चावल भी काफी महंगा हो गया है।
वर्ष 2027 में देश के पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव होने वाला है जिसमें उत्तर प्रदेश एवं पंजाब जैसे महत्वपूर्ण चावल उत्पादक राज्य भी शामिल है। सरकार ऐसे महत्वपूर्ण समय में खाद्य महंगाई को बेलगाम नहीं छोड़ना चाहेगी।