भारत से 25 लाख टन गेहूं का निर्यात होना कठिन

18-Feb-2026 11:13 AM

नई दिल्ली। यद्यपि केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं के व्यापारिक निर्यात की अनुमति दी है मगर घरेलू एवं वैश्विक बाजार के परिदृश्य को देखते हुए चालू वर्ष के दौरान इस सम्पूर्ण मात्रा का शिपमेंट होना मुश्किल लगता है। साबुत गेहूं के साथ-साथ सरकार ने गेहूं के मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्यात कोटा भी 5 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन नियत कर दिया है। इससे आयातक देशों में गेहूं की खरीद के प्रति दिलचस्पी घट सकती है।

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार गेहूं का घरेलू बाजार भाव वैश्विक बाजार मूल्य से ऊंचा चल रहा है। रूस, अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, अर्जेंटीना एवं फ़्रांस सहित अन्य आपूर्तिकर्ता देश अपने गेहूं का निर्यात बढ़ाने के लिए आक्रामक नीति अपना रहे हैं और उसकी सख्त प्रतिस्पर्धा एवं कठिन चुनौती का सामना करना भारत के लिए आसान नहीं होगा। कुछ पड़ोसी देश भारत से गेहूं का आयात कर सकते हैं।

समीक्षकों के अनुसार केंद्र सरकार ने 2025-26 के रबी सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 160 रुपए बढ़ाकर 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसान इससे नीचे दाम पर व्यापारियों को अपना उत्पाद नहीं बेचना चाहेंगे। इसका मतलब यह हुआ कि व्यापारियों/निर्यातकों को करीब 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं मिल सकता है और अन्य खर्चों को मिलाने पर यह और भी ऊंचा हो जाएगा। निर्यातकों को कुछ प्रॉफिट भी चाहिए। इतने ऊंचे मूल्य स्तर पर कोई भी दूरस्थ देश भारतीय गेहूं खरीदना पसंद नहीं करेंगे। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का औसत थोक मंडी भाव जनवरी में 2587 रुपए प्रति क्विंटल रहा था जो फरवरी के प्रथम पखवाड़े में घटकर 2527 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया लेकिन फिर भी निर्यात उद्देश्य के लिए यह भाव ऊंचा माना जा रहा है।