बांग्लादेश में गेहूं आयात महंगा, भारत के लिए अवसर बढ़ा

11-Aug-2026 06:14 PM

बांग्लादेश अमेरिका से गेहूं की खरीद जारी रखे हुए है, लेकिन अमेरिकी गेहूं रूसी गेहूं की तुलना में करीब 65–70 डॉलर प्रति टन महंगा पड़ रहा है। इसका प्रमुख कारण अधिक मालभाड़ा है। अमेरिका से गेहूं पहुंचने में करीब 55 दिन लगते हैं, जबकि रूस से लगभग 15 दिन।

1 जुलाई को बांग्लादेश ने सरकार-से-सरकार समझौते के तहत 2.20 लाख टन अमेरिकी गेहूं 332 डॉलर प्रति टन की दर से खरीदने को मंजूरी दी। वहीं अंतरराष्ट्रीय टेंडर में 50,000 टन गेहूं 297.92 डॉलर प्रति टन में खरीदा गया, जो अमेरिकी गेहूं से 34 डॉलर से अधिक सस्ता है।

बांग्लादेश की घरेलू गेहूं उत्पादन क्षमता उसकी कुल मांग का केवल करीब 13% है। 2024-25 में देश ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के माध्यम से कुल 62.35 लाख टन गेहूं आयात किया था। भारत द्वारा 2022 में निर्यात प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बांग्लादेश ने अर्जेंटीना सहित अन्य देशों से आपूर्ति बढ़ाई।

हालांकि, काला सागर क्षेत्र में रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण बंदरगाहों और शिपमेंट में बढ़ते व्यवधान से बांग्लादेश के लिए रूसी और यूक्रेनी गेहूं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भारत फिर से एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बन सकता है।

भारत से बांग्लादेश को हाल में गेहूं की आपूर्ति बढ़ी है और आगे बांग्लादेश की मांग और बढ़ सकती है। इसके अलावा, अन्य आयातक देशों की ओर से भी भारतीय गेहूं के लिए पूछताछ बढ़ रही है। यदि काला सागर संकट जारी रहता है, तो भारतीय गेहूं की निर्यात मांग घरेलू कीमतों को भी मजबूत समर्थन दे सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के तेज होने और काला सागर में जहाजों, बंदरगाहों व निर्यात टर्मिनलों पर बढ़ते हमलों से वैश्विक अनाज आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यूक्रेन ने 2026-27 के लिए कृषि निर्यात अनुमान 6.44 करोड़ टन से घटाकर करीब 2.96 करोड़ टन कर दिया है, जबकि गेहूं निर्यात 53% घटकर 83 लाख टन रहने का अनुमान है।

रूस से भी अगस्त में गेहूं निर्यात घटकर 30–34 लाख टन रह सकता है, जो 2016-17 के बाद सबसे निचला स्तर होगा। काला सागर में सुरक्षा जोखिम और शिपमेंट में बाधा से वैश्विक गेहूं कीमतों को समर्थन मिल रहा है।

इस स्थिति में भारत के गेहूं की मांग बढ़ने की संभावना है। खासकर बांग्लादेश काला सागर क्षेत्र से आपूर्ति में व्यवधान के कारण भारत से गेहूं आयात बढ़ा सकता है। इसके अलावा अन्य देशों की ओर से भी भारतीय गेहूं की मांग और पूछताछ बढ़ रही है।

भारत में पर्याप्त सरकारी और घरेलू स्टॉक उपलब्ध होने के कारण यदि निर्यात मांग लगातार बढ़ती है, तो घरेलू गेहूं बाजार में भी कीमतों को आगे समर्थन मिल सकता है।