अप्रैल में सीपीआई आधारित महंगाई 15 माह के उच्च स्तर पर

08-May-2026 11:21 AM

नई दिल्ली। देश में खुदरा महंगाई की दर अप्रैल में बढ़कर 3.8 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है जो न केवल पिछले 15 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक के मीडियम टर्म टारगेट 4 प्रतिशत के काफी करीब भी है। इससे भारत पर पश्चिम एशिया के संकट का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है।

मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी जो अप्रैल में बढ़कर 3.8 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है। अप्रैल 2025 में भी यह 3.5 प्रतिशत तक ही पहुंची थी। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2026 का आधिकारिक आंकड़ा अगले सप्ताह जारी किए जाने की संभावना है। 

अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई की वृद्धि की जड़ में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस है। भवन, पानी, बिजली, गैस एवं अन्य ऊर्जा स्रोतों में महंगाई की दर मार्च के 1.9 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 3.2 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है।  वैसे खुदरा महंगाई की दर 4 प्रतिशत के नियत लक्ष्य से नीचे रहेगी जिससे सरकार राहत की सांस ले सकती है। 

खाद्य उत्पादों के संवर्ग में कुछ वस्तुओं का भाव तेज हुआ जबकि कुछ अन्य जिंसों की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। खाद्य तेल में महंगाई दर 2 प्रतिशत एवं टमाटर में 3 प्रतिशत बढ़ी जबकि आलू एवं प्याज में करीब 4 प्रतिशत घट गई। खाद्य उत्पाद एवं ईंधन संवर्ग में महंगाई की दर मार्च के 3.3 प्रतिशत से सुधर कर अप्रैल में 3.5 प्रतिशत हो गई। पश्चिम एशिया में संकट फिर बढ़ गया है जबकि आगे अल नीनो का खतरा भी है।