अन्य जिंसों की तर्ज पर बासमती प्रोमोशन बोर्ड के गठन पर विचार

19-May-2026 12:03 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीन पहले से ही कई जिंसों के लिए गठित बोर्ड काम कर रहा है। अब उसी की तर्ज पर प्रीमियम क्वालिटी के चावल के लिए एक बासमती विकास बोर्ड के गठन की योजना पर विचार किया जा रहा है।

दरअसल भारतीय चावल के दो शीर्ष निर्यातक संगठनों द्वारा इस बोर्ड के गठन की मांग की जा रही है। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री तथा केन्द्रीय सहकारिता मंत्री से एक ऐसा पूरी तरह समर्थित और वैधानिक बासमती प्रोमोशन बोर्ड गठित करने का आग्रह किया है जो वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के नियंत्रण से बाहर हो। 

समझा जाता है कि ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (ऐरिया) तथा पंजाब राइस मिलर्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन इस बासमती प्रोमोशन बोर्ड के गठन के पक्ष में है।

पिछले दिन बी के एस द्वारा आयोजित एक मिटिंग में इन संगठनों के शीर्ष पदाधिकरियों के साथ-साथ किसानों के प्रतिनिधि अनेक कृषि विशेषज्ञ तथा उद्योग समीक्षक मौजूद थे उस मीटिंग में यह मुद्दा उठाया गया। बी के एस ने केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री से एक अलग बासमती विकास बोर्ड गठित करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इसी तरह का अनुरोध किया गया है। 

जानकार सूत्रों के मुताबिक बासमती चावल का आर्थिक लाभ समुचित तरीके से धान उत्पादक किसानों तक नहीं पहुंच रहा है जिससे उसकी वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है। बासमती धान का भाव एक निश्चित सीमा में स्थिर रहने के कारण किसानों की आमदनी घट रही है। लागत खर्च में वृद्धि होने से किसानों की चिंता और भी बढ़ गई है। बासमती को भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा प्राप्त है मगर किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।